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समरसता को प्रत्यक्ष आचरण में लाने से ही समाप्त होगा सामाजिक भेदभाव – अतुल लिमये जी

Social discrimination will only end by putting harmony into practical action – Atul Limaye

रुद्राक्ष अभिमंत्रण और गौ-पूजन के साथ पूर्ण हुआ रामसागर पारा बस्ती का विराट हिन्दू सम्मेलन

रायपुर, 11 दिसंबर 2025। हिन्दू जागरण समिति द्वारा भैंसथान मैदान, अग्रसेन चौक पर आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में धर्म प्रेमी नागरिकों की उपस्थिति ने हिन्दू समाज की एकजुटता का परिचय दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी प्रेरक उद्बोधन में समाजिक एकता और समरसता के भाव को लेकर वक्तव्य दिया।

हमारा प्रत्यक्ष आचरण ही समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर सकता है, जिससे वास्तविक सामाजिक समरसता स्थापित होगी। भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दहलीज पर खड़ा है, ऐसे में हमें केवल गर्व करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि अपने सामर्थ्य को बढ़ाकर वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करना है।

उन्होंने कहा कि यह विराट हिन्दू सम्मेलन, समाज में एक परिवर्तनकारी जागरण का शंखनाद है। पूर्व में विदेशी आक्रमणों के कारण भारत की वैभवशाली सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी। जिसे गुरु गोविंद सिंह जी जैसे महापुरुषों और छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘हिंदवी स्वराज’ के संकल्प ने पुनर्जीवित किया। आज वही दृश्य पुनः निर्मित हो रहा है।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान और वैश्विक प्रभाव

वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में 90 मंदिरों की पुनर्स्थापना, 171 देशों में प्राचीन योग विधा का प्रसार और चंद्रयान की सफलता ‘एस्पिरेंट इंडिया’ (आकांक्षी भारत) की द्रुत गति को दर्शाती है। आज योग के माध्यम से विश्व भर में करोड़ों लोग स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के हिन्दुत्व के विचार ने ही दुनिया को ‘सम-व्यवहार’ की भाषा समझाई है।

सह सरकार्यवाह जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वामपंथ एक बड़ी चुनौती है, जो ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ के रूप में भारत को विकसित होने से रोकने वाली शक्ति है। उन्होंने मतांतरण और रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) के खिलाफ क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। जातिगत भेदभाव को भुलाकर समरसतापूर्ण व्यवहार को मूल भाव में लाना होगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रुद्राक्ष अभिमंत्रण

सम्मेलन का स्वरूप अत्यंत भव्य और संस्कृति-प्रधान रहा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र (सांस्कृतिक कार्यक्रम) की शुरुआत श्री गणेश वंदना के साथ हुई। इसके पश्चात वर्तमान परिदृश्य में बुजुर्गों के जीवन की वास्तविकता को दर्शाता एक भावपूर्ण नाट्य मंचन किया गया। छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य और देशभक्ति गीतों पर प्रस्तुतियों ने समां बांधा। विशेष रूप से श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और श्रीकृष्ण जी की जीवन लीला पर आधारित नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन संगीतमय सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। श्री हनुमान चालीसा के तत्काल बाद अतिथियों ने गौ-पूजन किया और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में विशेष रूप से भारतीय संत महापुरुषों की जीवनी का उल्लेख था। प्रमुख रूप से जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, महाप्रभु वल्लभाचार्य जी, संत गाहिरा गुरु, स्वामी आत्मानंद, संत तुकाराम, अक्का महादेवी, गुरु घासीदास बाबा जी, संत आनंदमयी माँ, रामकृष्ण परमहंस, महर्षि वाल्मीकि, संत रैदास (रविदास), गुरु नानक देव, संत ज्ञानेश्वर महाराज का परिचय प्रदान किया गया था।

रायपुर के प्रतिष्ठित श्रीराम मंदिर, वी.आई.पी. चौक के मुख्य पुजारी हनुमंत लाल महाराज ने मंचीय कार्यक्रम के दौरान रुद्राक्ष अभिमंत्रण का विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया।

मुख्य अतिथि महंत श्रीरामसुंदर दास जी महाराज और संत श्री वेद प्रकाश जी महाराज ने अपना आशीर्वचन हिन्दू समाज को प्रदान किया। जिसमें उन्होंने कुटुम्ब की शक्ति, भेद-भाव रहित हिन्दू समाज जैसे विषयों की जानकारी प्रदान की। मातृशक्ति संबोधन के लिए दीपिका सोनी ने सामाजिक पंच परिवर्तन का विषय रखा। इस अवसर पर उपस्थित संत वृन्दों और समाज प्रमुखों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ और इस विराट हिन्दू सम्मेलन में केवल रामसागर पारा और इसके पास के क्षेत्रों से हिन्दू समाज जन उपस्थित रहा।

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