डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार: सार्वजनिक कार्य का अनुभव
उस समय कलकत्ता क्रान्तिकारी आन्दोलन का केन्द्र था। केशवराव हेडगेवार का नागपुर में ही क्रान्तिकारियों से सम्पर्क हो गया था। वह क्रान्तिकारियों के विश्वस्त मण्डल के सदस्य थे। कलकत्ता में…
पुस्तक पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिन्ताजनक: मनोजकांत जी
लखनऊ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोजकांत जी ने विद्यार्थियों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होने पर चिन्ता व्यक्त की है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया…
भगवान हनुमान और लक्ष्मण की पावन नगरी लखनऊ के बड़े मंगल भंडारों को ‘हरित और स्वच्छ’ बनाने का संकल्प
लखनऊभगवान हनुमान और लक्ष्मण की इस ऐतिहासिक नगरी में जेठ माह के प्रत्येक मंगलवार (बडे मंगल) को होने वाले भंडारों की परंपरा अनूठी और अटूट है। इस वर्ष जेठ मास…
माता सीता की संकल्पशीलता, दायित्व बोध और मर्यादा का पालन आज भी प्रासंगिक
माता सीता के जीवन और उनके जीवन में घटी घटनाओं को हजारों वर्ष बीत गये हैं। लेकिन स्मृति में वे आज भी जीवन्त हैं। उनका व्यक्तिगत जीवन त्याग, तपस्यामय, संकल्पशीलता,…
संवाद की अनादि परंपरा: प्राचीन भारत से आधुनिक टेलीफोन तक की यात्रा
आज National Telephone Day के अवसर पर जब हम आधुनिक संचार की गति और सुविधा पर गर्व करते हैं, तब यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है—क्या संवाद की यह…
हिंदू जागरण: उत्सव से समाज-निर्माण तक
अप्रैल का महीना हिंदू पंचांग में पर्वो और परंपराओं की बहार लाता है। राम नवमी, हनुमान जयंती, वैशाखी, अक्षय तृतीया और अन्य अनेक त्योहार एक के बाद एक आते हैं।…
स्वदेशी ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत: रूफटॉप सोलर में लखनऊ बना देश का नंबर 1 शहर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश स्वदेशी ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लखनऊ देश का नंबर 1 शहर बन गया है, जहां रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन…
आदि शंकराचार्य: सनातन धर्म के पुनर्जागरण के दिव्य प्रकाश स्तंभ
‘शंकरो शंकर: साक्षात्’। एक संन्यासी बालक, जिसकी आयु मात्र 7 वर्ष थी, गुरुगृह के नियमानुसार एक ब्राह्मण के घर भिक्षा माँगने पहुँचा। उस ब्राह्मण के घर में भिक्षा देने के…
कृष्ण की लीला और भीष्म का आशीर्वाद: द्रौपदी की रक्षा का अद्भुत प्रसंग
महाभारतका युद्ध प्रारम्भ हो गया था। सहसा एक रात्रिको धर्मराजके चरोंने समाचार दिया कि दुर्योधनके द्वारा उत्तेजित किये जानेपर भीष्मपितामहने प्रतिज्ञा की है कि कल वे समस्त सैन्यके साथ पाँचों…
संत रामानुजाचार्य: जीवन, दर्शन और सामाजिक समरसता के महान प्रवर्तक
संत रामानुजाचार्य का जन्म श्रीपेरुंबुडूर, तमिलनाडु में 1074 ईस्वी (वैशाख शुक्ल षष्ठी,1017) में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवाचार्य व माता जी का नाम कान्तिमती था। बचपन से ही…









