गुरु के रूप में मार्गदर्शन करता है ‘भगवा ध्वज’
डॉ. लोकेन्द्र सिंहलेखक, वरिष्ठ स्तम्भकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज को जो स्थान दिया गया है, वह इस संगठन की विशिष्टता को दर्शाता है। संघ...
श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा
अयोध्या चर्चा में है, सदा रहती आयी है। मानवेन्द्र महाराज मनु-निर्मिता यह नगरी कभी अप्रासंगिक नहीं होती। सन्दर्भ-प्रसंग कोई हो, पर अयोध्या उल्लेखनीय बनी रहती है।...
‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी
मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर...
राष्ट्र सेविका समिति ने ‘जनसंख्या असंतुलन’ पर प्रस्ताव पास किया
समालखा (हरियाणा)। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी और प्रतिनिधि मंडल की छमाही बैठक समालखा, हरियाणा में संपन्न हुई। बैठक में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी...
‘हाइपर कनेक्टिविटी’ के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन
प्रो. संजय द्विवेदी सही मायनों में मानव सभ्यता के इतिहास में दुनिया इतनी कनेक्टेड कभी नहीं थी। एक क्लिक, एक संदेश और कुछ ही सेकेंड्स में...
डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी
डॉ. हेडगेवार निवास पर आधारित विशेष आवरण, सूचना पुस्तिका का लोकार्पण नागपुर, 31 जुलाई 2026। भारतीय डाक विभाग, नागपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ....
एक सैनिक की आँखों में बसा विभाजन का दर्द
कृष्णनन्द सागर मेरे एक मित्र श्री विजयेद्रनाथ शर्मा की बेटी की शादी में श्री अर्जुन देव रौली से भेंट हुई। भारतीय वायुसेना से ग्रुप कैप्टन के...
भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है – दत्तात्रेय होसबाले जी
गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया। भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026।...
चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम
“एक रोटी की शिकायत… और देखते ही देखते पूरी नैनी सेंट्रल जेल रणभूमि बन गई। आखिर 20 जनवरी 1928 को ऐसा क्या हुआ था कि गोलियाँ...
भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है
भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग...
