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भेदभाव छोड़िए, सबको अपना मानिए- डाॅ. मोहन भागवत जी

भेदभाव छोड़िए, सबको अपना मानिए- डाॅ. मोहन भागवत जी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत जी ने समाज, राष्ट्र और परिवार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि संघ का उदय नागपुर की एक छोटी शाखा से हुआ था, जो आज पूरे देश में फैल चुका है.

डाॅ. मोहन भागवत जी ने जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति, भाषा, संपत्ति या सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि पूरा देश सभी का है और यही भावना सच्ची सामाजिक समरसता की पहचान है. उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता की पहली शर्त मन से भेदभाव की भावना को खत्म करना और हर व्यक्ति को अपना समझना है. उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि वे आपसी समझ को बढ़ाएं, संकट के समय एक-दूसरे का सहारा बनें और देश के इतिहास व पूर्वजों को जानने का प्रयास करें.

परिवार के संदर्भ में उन्होंने सुझाव दिया कि हर सप्ताह कम से कम एक दिन परिवार के सदस्य साथ बैठें, घर का बना भोजन साथ खाएं और प्रार्थना करें. इससे न केवल पारिवारिक बल्कि सामाजिक रिश्ते भी मजबूत होंगे. पर्यावरण और विकास को लेकर उन्होंने दोनों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने कहा कि विकास के लिए जंगल काटने या पर्यावरण की रक्षा के नाम पर विकास को रोकना उचित नहीं है. जल संरक्षण और पेड़ लगाने को व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानते हुए उन्होंने सभी से इसे अपनाने की अपील की. धर्मांतरण के मुद्दे पर मोहन भागवत ने कहा कि समाज में भरोसे की कमी इसका एक बड़ा कारण है. यदि लोगों का जमीनी स्तर पर आपसी जुड़ाव बढ़े, तो ऐसी समस्याओं का समाधान संभव है. इसके लिए सामूहिक प्रयास और सामाजिक मेलजोल आवश्यक है.

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