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इन कारणों से स्मार्ट भाषा है संस्कृत…

इन कारणों से स्मार्ट भाषा है संस्कृत...

हम अपने बचपन के दिनों में संस्कृत के श्लोक कंठस्थ किया करते थे। हमारे शिक्षक अक्सर कहा करते थे कि संस्कृत बोलने से जुबान साफ होती है। वे यह भी बताते थे कि कंप्यूटर संस्कृत भाषा के कमांड को बड़ी आसानी से समझ सकता है। कई बार विदेशियों के शरीर पर संस्कृत के श्लोक गुदे हुए दिखाई देते थे। तब शायद हमें इसकी गहराई का अंदाजा नहीं था, लेकिन समय के साथ हम समझने लगे कि संस्कृत वास्तव में कितनी उपयोगी भाषा है।

कम ही लोग जानते हैं कि संस्कृत को कंप्यूटर के लिए सबसे सटीक और सुगम भाषा माना जाता है। संस्कृत को न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक होने का गौरव प्राप्त है। यही नहीं, हिन्दी, उर्दू, बंगला, मराठी, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, असमी, गुरखाली और कश्मीरी जैसी आर्य भाषाओं का संस्कृत की परम्परा से गहरा सम्बन्ध माना जाता है। संस्कृत को इन आर्य भाषाओं की मूल भाषा सिद्ध करते हुए मैक्समूलर ने लिखा था कि— इनमें जितने शब्द हैं, वे संस्कृत की महज 500 धातुओं से निकले हैं लेकिन यह तो संस्कृत की खूबियों की बस एक झलक है। ऐसे कई और कारण हैं, जिन्हें जानकर आपको भी संस्कृत की समृद्धता और उपयोगिता पर गर्व होगा।

1. संस्कृत में शब्द-क्रम अपेक्षाकृत लचीला है।
संस्कृत में विभक्ति और शब्दों के रूप से उनके व्याकरणिक सम्बन्ध स्पष्ट होते हैं इसलिए शब्दों का क्रम काफी हद तक बदला जा सकता है हालांकि सामान्य शब्द-क्रम की प्रवृत्ति भी होती है।

2. संस्कृत सबसे प्राचीन ज्ञात इण्डो-आर्यन भाषाओं में है।
संस्कृत को भाषावैज्ञानिक साहित्य में सबसे पुरानी इंडो-आर्यन भाषा माना जाता है। इसका सबसे प्राचीन रूप वैदिक संस्कृत है और ऋग्वेद की रचना लगभग 1500 ईसा पूर्व के आसपास मानी जाती है।

3. संस्कृत की मौखिक परम्परा अत्यन्त मजबूत रही है।
वेदों और वैदिक संस्कृत के ग्रन्थों को लम्बे समय तक मौखिक परम्परा के माध्यम से अत्यन्त सावधानी से संरक्षित किया गया बाद में इन्हें लिखित रूप में भी दर्ज किया गया।

4. संस्कृत का आधुनिक भारतीय भाषाओं के विकास से सम्बन्ध है।
संस्कृत से मध्य-भारतीय भाषाओं यानी प्राकृतों के विकास का सम्बन्ध है और आधुनिक इण्डो-आर्यन भाषाओं— जैसे हिन्दी, गुजराती और बंगाली भाषा का विकास इसी व्यापक भाषाई परम्परा से हुआ।

5. संस्कृत और AI के संबंध पर 1985 में महत्वपूर्ण शोध हुआ।
NASA Ames Research Center से जुड़े शोधकर्ता रिक ब्रिग्स ने 1985 में Knowledge Representation in Sanskrit and Artificial Intelligence नामक शोध-पत्र प्रकाशित किया। इसमें संस्कृत की व्याकरणिक संरचना और Artificial Intelligence में Knowledge Representation के बीच समानताओं पर चर्चा की गई।

6. जर्मनी में संस्कृत का अध्ययन होता है।
जर्मनी के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत का अध्ययन और अध्यापन होता रहा है। 14 जर्मन विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाए जाने की संख्या का उल्लेख उपलब्ध स्रोतों में मिलता है। यह संख्या किस वर्ष की है, यह स्पष्ट करके ही इस्तेमाल करना बेहतर होगा।

7. संस्कृत का अन्तरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रभाव रहा है।
संस्कृत का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप से आगे मध्य एशिया से लेकर कंबोडिया और वियतनाम तक की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपराओं में रहा है।

8. ‘सुधर्मा’ संस्कृत का दैनिक समाचार-पत्र है।
मैसूर से प्रकाशित ‘सुधर्मा’ संस्कृत दैनिक की स्थापना 1970 में हुई थी। यह संस्कृत में प्रकाशित होने वाले प्रमुख दैनिक समाचार-पत्रों में है।

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