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भगिनी निवेदिता : भारतीय संस्कृति और समाज सेवा की प्रेरणा

भगिनी निवेदिता : भारतीय संस्कृति और समाज सेवा की प्रेरणा

अनंत यात्री भारतीय समाज और संस्कृति की महान सेविका भगिनी निवेदिता ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत की सेवा और उसकी सांस्कृतिक धरोहर के उत्थान में समर्पित कर दिया। उनका जन्म 28 अक्टूबर, 1867 को आयरलैण्ड के डंगैनन में हुआ। उनका वास्तविक नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल था। स्वामी विवेकानन्द के मार्गदर्शन और प्रेरणा से मार्गरेट ने…

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब: आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्रीय एकसूत्रता का महान संदेश

भारत ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की धरती है। यहाँ वेद, गीता, रामचरितमानस जैसे कई धार्मिक ग्रंथों की रचना हुई। विश्व के प्रमुख धर्मग्रंथों में सबसे नवीन है गुरु ग्रंथ साहिब। न केवल आकार की दृष्टि से, बल्कि सामग्री के लिहाज से भी यह एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें ईश्वर और मोक्ष के अलावा जीवन के…

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प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: भारतीय इतिहास का एक रक्तरंजित अध्याय

प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: भारतीय इतिहास का एक रक्तरंजित अध्याय

अमन दुबे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लम्बे और संघर्षपूर्ण इतिहास में कई ऐसी घटनाएँ दर्ज हैं जिन्होंने देश की दिशा और दशा को हमेशा के लिये बदल कर रख दिया। इन्हीं हृदयविदारक घटनाओं में से एक है- 16 अगस्त 1946 का ‘प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस’ (Direct Action Day), जिसे इतिहास में ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के भयावह…

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राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

बंदा सिंह बहादुर (बंदा वैरागी) समय की पुकार की उपेक्षा कर एकान्त साधना में लीन थे। उसी समय उनकी भेंट दशम गुरु, श्री गुरु गोविन्द सिंह जी से हुई। गुरुजी ने समाज पर हो रहे अत्याचारों, धार्मिक उत्पीड़न तथा पराधीनता की पीड़ा का वर्णन करते हुए कहा “जब देश, धर्म और संस्कृति संकट में हों…

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डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें…

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'बस जीवित रहना, मरना नहीं': एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े चलाते थे। अखाड़ों में कुश्ती के साथ-साथ मलखम्ब, तलवार, गतका आदि का भी अभ्यास किया जाता था। पिताजी अपने होटल से ही पहलवानों को खूब…

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चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

“एक रोटी की शिकायत… और देखते ही देखते पूरी नैनी सेंट्रल जेल रणभूमि बन गई। आखिर 20 जनवरी 1928 को ऐसा क्या हुआ था कि गोलियाँ चलानी पड़ीं, कई लोग मारे गए और एक कैदी को उम्रकैद की सज़ा मिली? यह कहानी है उन्नाव के चतुरी की।” ब्रिटिश राज में 1898 में उत्तर प्रदेश के…

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प्रकृति प्रेमी कालिदास

महाकवि कालिदास: जीवन, रचनाएँ, साहित्य और प्रेरणादायक व्यक्तित्व

भारतीय साहित्य के इतिहास में यदि किसी एक कवि ने अपनी प्रतिभा से भाषा, संस्कृति, प्रकृति, दर्शन और मानवीय भावनाओं को एक साथ अमर बना दिया, तो वे महाकवि कालिदास हैं। संस्कृत साहित्य के इस महान् कवि और नाटककार ने अपनी अनुपम रचनाओं के माध्यम से न केवल भारतीय काव्य परम्परा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान…

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इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप: लालकृष्ण आडवाणी और विद्यानिवास मिश्र के संस्मरण

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति आज भी अनेक सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्थलों और सामाजिक जीवन में दिखाई देती है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा प्रख्यात साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र ने अपनी यात्राओं के दौरान ऐसे कई अनुभव साझा किए, जिनमें रामायण, महाभारत और संस्कृत परंपरा के प्रभाव का उल्लेख मिलता है। इन संस्मरणों के माध्यम से इंडोनेशिया…

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लाहौर में हिन्दू नेताओं की बैठक : चौ. छोटूराम की आशंका

जनवरी 1947 में संघ की ओर से लाहौर में हिन्दू ने. ताओं की एक बैठक बुलायी गई थी, जिसमें पंजाब मन्त्रीमण्डल के कई हिन्दू मन्त्री भी उपस्थित थे। उनमें कुछ कांग्रेसी भी थे। इस बैठक में चौधरी छोटूराम ने कहा था- “जब तक यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार है, विभाजन नहीं हो सकता। लेकिन मुझे खतरा…

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