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लिंगराज मंदिर: भुवनेश्वर की आध्यात्मिक धड़कन

इतिहास और स्थापत्य की अद्भुत धरोहर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर 11वीं शताब्दी का एक भव्य और प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर कलिंग स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। लगभग 180 फीट ऊँचा इसका शिखर दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता है। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित…

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छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य में जल प्रबंधन

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य में जल प्रबंधन

सह्याद्रि के उत्तुंग शिखरों पर आसमान से बातें करने वाला गिरिदुर्ग हो या फिर समुद्री लहरों के बीच मुस्कुराते जलदुर्ग, उनकी व्यवस्थाएं देखकर ध्यान आता है कि हिन्दवी स्वराज्य के योजनाकार, वास्तुकार, अभियंता और निर्माण में योगदान करने वाले सभी शिल्पकार एवं श्रमिक अपने कार्य-कौशल में सिद्धस्थ थे। सुरक्षा पक्ष हो या फिर कला पक्ष,…

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जब डराने वाले ही डर गए थे

जब डराने वाले ही डर गए थे

1946 के सैन्य विद्रोह से कांप गई ब्रिटिश सत्ता 80 वर्ष पूर्व 1946 में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध हुआ सैन्य विद्रोह स्वाधीनता संग्राम का अंतिम युद्ध माना जाता है। सेना व पुलिस के बल पर ही अंग्रेज शासन करते थे और उनके बल पर ही 1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम, 1920-22 के असहयोग आंदोलन एवं…

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संघ शताब्दी – राष्ट्रीय संकट के समय दिया एकजुटता का संदेश

संघ शताब्दी – राष्ट्रीय संकट के समय दिया एकजुटता का संदेश

1962 के भारत-चीन युद्ध को हम आज भी भूल नहीं पाते हैं। चीन ने भारत के विश्वास का कत्ल किया था। ‘हिन्दी-चीनी, भाई-भाई’ के नारे को धुंए में उड़ाकर चीन की कम्युनिस्ट सत्ता ने भारत पर अप्रत्याशित युद्ध थोप दिया था। हमारी सेना ने यथासंभव प्रतिकार किया। चीन को नाकों चने चबाने को मजबूर कर…

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भारत भूमि के योद्धा-संन्यासी, महान विचारक : स्वामी विवेकानन्द

भारत भूमि के योद्धा-संन्यासी, महान विचारक : स्वामी विवेकानन्द

भारत, प्राचीन काल से ही सम्पूर्ण विश्व के लिए एक अलौकिक पुण्यभूमि रहा है, जहाँ ऋषि-मुनियों, महापुरुषों, वैज्ञानिकों, विचारकों और समाज सुधारकों ने जन्म लेकर न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को जीवन का मार्ग दिखाया। आधुनिक युग में ऐसे ही विलक्षण संन्यासी थे स्वामी विवेकानन्द, जिनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ।…

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“स्वराज्य की जननी: जीजाबाई”

“स्वराज्य की जननी: जीजाबाई”

“महिलाओं के कारण ही पुरुषों का अस्तित्व एवं उत्थान सम्भव है। जीजाबाई से शिवाजी, कुन्ती से पाण्डव और कौशल्या से राम का अस्तित्व था।“ ये बात 9 नवम्बर 2025 को PES यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ के १०० साल (नए क्षितिज) 2 दिवसीय विशेष व्याख्यानमाला के…

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विभाजनकारी ताकतों का नया सियासी पैंतरा

विभाजनकारी ताकतों का नया सियासी पैंतरा

ऐसा बताया गया कि केरल के मुख्यमंत्री कामरेड पी. विजयन ने केरल में आयोजित कटिंग साउथ नाम से आयोजित कार्यक्रम का न केवल आगाज किया, बल्कि उसमें भाषण भी दिया। यह कहना था प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार का। प्रज्ञा प्रवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित सांस्कृतिक संगठन है। वह लखनऊ में…

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दण्डक्रम करने से समाज को क्या लाभ हुआ ?

दण्डक्रम करने से समाज को क्या लाभ हुआ ?

अथवा पचास दिन वेद पढ़ने से के फ़ायदा हुआ जी , जैसे प्रश्न मुझे भी किया गया । और इसी से मिलती जुलती बकवास वे शक्तियां जो वेदों में अश्रद्धा रखती हैं उनका भी विलाप शुरू हो चुका है । तो उन्हें अथवा हर शंकालु को बता दिया जाये कि दण्डक्रम केवल मेधा ही नहीं…

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हम सभी श्रद्धापूर्वक मातृभूमि की महिमा का गायन करें

हम सभी श्रद्धापूर्वक मातृभूमि की महिमा का गायन करें

अपनी भूमि हमें मातृभूमि लगनी चाहिए। उसका कण-कण हमें पवित्र लगना चाहिए। हमारी मातृभूमि, कोई मिट्टी का ढेर नहीं, वह जड़ या अचेतन नहीं, ऐसी हमारी भावना चाहिये। इस प्रकार की जिनकी भावना और श्रद्धा रहेगी, उनका ही ‘राष्ट्र’ बनेगा और वे ही राष्ट्रीय कहलाए जाएंगे, यह सत्य श्री गुरुजी ने बहुत स्पष्ट शब्दों में…

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सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज

तीन प्रकार के अन्य ध्वज भी कराते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के शील, औदार्य और शौर्य का स्मरण…. सत्यनिष्ठा से युक्त प्रतिभाएं पूर्ण होती है. सदुदेश्य से किए गए उचित प्रयत्न विफल नहीं होते। पुण्यों का फल मनुष्य को प्राप्तव्य की प्राप्ति करा ही देता है। श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर पर ध्वजारोहण सनातन की इसी विश्वास-परंपरा…

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