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अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा – डॉ. मोहन भागवत जी

अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा – डॉ. मोहन भागवत जी

भोपाल, 02 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं जब समाज गुण सम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

सरसंघचालक जी ने कहा कि यदि हमें देश के लिए कुछ करना है तो इस मार्ग में हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे। दुनिया में संघ ने ही एकमात्र ऐसी पद्धति दी है, जो अच्छी आदतें विकसित करती है। संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार हर क्षेत्र में कार्य करते थे। लेकिन उन्हें चिंता यह थी कि देश में एकता कैसे स्थापित होगी। इस भाव को उत्पन्न करने वाले संगठन का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। दुनिया में कहीं दूसरी पद्धति नहीं है व्यक्ति निर्माण की। संघ की शाखा देशभक्ति सिखाती है। यदि इसका अनुभव लेना है और उद्देश्य को जीना है तो शाखा एकमात्र जगह है। यहां कोई बंधन नहीं है।

उन्होंने कहा कि हम कई बार असुरक्षा और चिंता के साथ जीते हैं। लेकिन इसकी बजाय हमें भयमुक्त होकर जीना चाहिए। स्वयं से पहले देश को रखना चाहिए। अपने विकास से देश और परिवार प्रगति कर रहा है कि नहीं यह सोचना चाहिए। युवाओं को ही देश बनाना है और वे हर बात में आगे भी आते हैं।

जब आप देश की बात करते हैं तो प्रश्नों के जवाब देने होंगे और उसके लिए योग्यता लाना पड़ेगी। संघ में आकर तैयार होना पड़ेगा। मैं युवाओं से आह्वान करता हूं कि वे आए और संघ का अनुभव लें।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते और भोपाल करुणा धाम के प्रमुख सुदेश शांडिल्य जी महाराज ने युवाओं को संबोधित किया। इस अवसर पर मंच पर मध्यभारत प्रांत के सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी उपस्थित रहे।

युवाओं के प्रश्नों के उत्तर दिए –

युवा संवाद में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवाओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। संघ की भूमिका पर उन्होंने कहा कि विश्व शक्ति की सुनता है और संघ संपूर्ण समाज को साथ लेकर धर्म की रक्षा करते हुए देश को नया रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे युवाओं का निर्माण कर रहे हैं​, जो समाज में सार्थक फैशन को बढ़ाएं। सुरक्षा और करियर को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं दे सकता। बिना चिंता जीवन जिएं। मनुष्य अलग है, क्योंकि वह रिस्क लेता है। दुनिया सक्सेस को देखती है, ले​किन जैसे ही उस पथ पर चलने की कोशिश करते हैं तो संघर्ष देखकर डर जाते हैं। इसलिए बेहतर करियर वह है जिसमें आप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाएं और डर भी न लगे। सुविधा से सुख नहीं मिलता। एआई के सवाल पर कहा कि हमें एआई को कंट्रोल करना है, न कि कंट्रोल होना है। उसका उपयोग विकास में करना है। हमें ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो एआई या अन्य तकनीक का उपयोग देश हित में करें।

संघ उत्सव नहीं मना रहा

प्रथम सत्र में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते जी ने कहा कि संघ को 100 वर्ष में खूब प्रसिद्ध मिली। लेकिन संघ का प्रचार किया विरोधियों ने और नकारात्मक भाव में किया। कभी संघ को समझने का प्रयास नहीं किया। संघ वर्ष 1925 में नागपुर से प्रारंभ हुआ और जिस तरह भागीर​थ गंगा पृथ्वी पर लेकर आए, ठीक वैसे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी संघ कार्य को समाज के बीच लेकर गए। इसके पहले भारत में कभी इस तरह का प्रयास नहीं हुआ। डॉक्टर साहब ने नागपुर की बजाय कोलकता को पढ़ाई के लिए चुना और स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया। लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि देश के हिन्दू समाज को मानसिक गुलामी से मुक्त कराना होगा। संघ स्वामी विवेकानंद की तीन बातों का अनुसरण करते हुए काम करता है। पहली बात भारत के समाज को ऑर्गनाइजेशन सीखना पड़ेगा। दूसरा भारत में मेन मेकिंग यानी व्यक्ति के निर्माण की प्रक्रिया जरूरी है और तीसरी बात कि आने वाले 50 साल के लिए देश को प्राथमिकता पर रखकर भारत माता की आराधना करना। उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसा नहीं था, लेकिन डॉक्टर साहब ने और श्रीगुरूजी ने वह करके दिखाया। संघ 100 वर्ष पूरे होने पर उत्सव नहीं मना रहा है, बल्कि डोर टू डोर मेन टू मेन और हार्ट टू हार्ट पहुंचने की कोशिश कर रहा है। मेरा क्या योगदान देश और संघ के लिए हो सकता है, इसके लिए प्रयास करें।

संघ युवाओं को सामर्थ्यवान बना रहा

भोपाल करुणा धाम के प्रमुख सुदेश शांडिल्य जी महाराज ने युवाओं से कहा कि अक्सर हम सुनते हैं “समरथ को नहीं दोष गुसाई”। इसका यह मतलब नहीं कि कोई बलवान है, उसको दोष नहीं दिया जाता। वास्तव में समर्थ वह है, जिसकी नीयत में दोष नहीं हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थ बनेगा, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा। इसलिए संघ का समर्थ होना जरूरी है। परोपकार, सत्चरित्र, जनकल्याण की भावना और यश के पीछे नहीं भागने की भावना कहीं दिखाई दे रही है, तो वह केवल संघ है। उन्होंने सूर्य, गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि सूर्य सबको बराबर रोशनी देता है। गंगा के जल में लोग स्नान भी करते हैं और गंदे नाले भी मिलते हैं। लेकिन वह अविरल बह रही है, क्योंकि उसमें सामर्थ्य है सभी को समाहित करने का। ऐसे ही युवाओं को सामर्थ्यवान बनना है। भारत में युवाओं को सामर्थ्यवान बनाने का काम केवल संघ कर रहा है। उसकी शाखाओं में 100 साल से व्यक्ति निर्माण हो रहा है। साथ ही ईश्वर की आराधना करें, वह आपको सामर्थ्य देता है।

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