Category: संघ साहित्‍य

डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा,…

वे पंद्रह दिन… / 06 अगस्त, 1947

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव बुधवार… छः अगस्त. हमेशा की तरह गांधी जी तड़के ही उठ गए थे. बाहर अभी अंधेरा था. ‘वाह’ के शरणार्थी शिविर के निकट ही गांधीजी का…

गुरु के रूप में मार्गदर्शन करता है ‘भगवा ध्वज’

डॉ. लोकेन्द्र सिंहलेखक, वरिष्ठ स्तम्भकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज को जो स्थान दिया गया है, वह इस संगठन की विशिष्टता को दर्शाता है। संघ के लिए भगवा केवल…

भाऊराव देवरस: सजीव अस्तित्वरूप

भाऊराव देवरस लखनऊ आए थे। पुराने कुछ सहयोगी उनसे बात कर रहे थे। अचानक वे बोल पड़े, ‘सुनो! डॉ. हेडगेवार की पीढ़ी के लोग एक-एक कर चले गए। दो-चार बचे…

स्वयंसेवक कौन – सेवा जब स्वभाव बन जाए

एक बार एक वृद्ध व्यक्ति और एक युवक सड़क के किनारे बस की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी वहाँ एक अंधा व्यक्ति आया। उसे सड़क पार करनी थी, लेकिन तेज…

सहज सकोची

जहाँ तक स्मरण आता है, मैंने पहले-पहल श्री गुरुजी को सन 1936 में पटना स्टेशन पर देखा था। गया में संघ शाखा प्रारम्भ हो चुकी थी। उन दिनों संघ में…

रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक…

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण 1946 का वर्ष भारत के इतिहास में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल का काल माना जाता है। विभाजन से पहले…

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों शुरू हुआ? जानिए इसका इतिहास

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों और कब से शुरू हुआ? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघ में दण्ड का प्रयोग केवल शारीरिक प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मरक्षा और…