लखनऊ में जन्मीं राष्ट्रवादी लेखिका व राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों से प्रेरित सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कमला चौधरी सशक्त महिला थीं। कमला के पिता राम मनमोहन दयाल जहाँ डिप्टी कलेक्टर थे, वहीं उनके नाना 1857 के स्वाधीनता संग्राम में लखनऊ में स्वतंत्र अवध बलों के कमाण्डर थे। उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के चलते कमला चौधरी को शिक्षा के लिये कठिन संघर्ष करना पड़ा था। कमला जी का परिवार अत्यन्त शिक्षित एवं सम्पन्न था फिर भी शिक्षा प्राप्त करने के विषय में उनकी दशा समाज की अन्य लड़कियों के समान ही थी। उनके लिये शिक्षा को जारी रखना आसान नहीं था। इसी से उन्हें महिलाओं की सामाजिक स्थिति का ज्ञान हुआ।
वह महिलाओं की समस्याओं के प्रति सचेत हो उठीं। कमला चौधरी को लेखन में रुचि थी। उन्होंने बचपन से ही अपने राष्ट्रवादी विचारों को लिखना प्रारम्भ कर दिया था। देश के अलग-अलग क्षेत्रों और प्रभाकर की डिग्री प्राप्त की। उनका विवाह जे.एम. में पली बढ़ी कमला ने परिवार की आपत्तियों के बाद भी पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी में रत्न चौधरी से हुआ। विवाह के पश्चात चरखा समितियों का गठन कर उन्होंने महिलाओं को देश की आजादी के संघर्ष से जोड़ने का कार्य किया। एक सभा में तिरंगा फहराने के अपराध में अँग्रेज सरकार ने उन्हें जेल की सजा सुनायी। वह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छह बार जेल गयीं। वह एक लोकप्रिय लघुकथा लेखिका थीं। जातिगत भेदभाव, धर्मनिरपेक्षता, साम्प्रदायिकता, वर्गभेद, आचार-विचार उनकी कहानियों के महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। अपने लेखों के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के जीवन की सच्चायी को उकेरा।
आँखें खुलीं, सूर्या, स्वप्न, साधना का उन्माद, उन्माद (1934), पिकनिक (1936), यात्रा (1947) बेल पत्र और प्रसादी कमण्डल उनकी प्रमुख साहित्यिक रचनाएँ हैं। कमला चौधरी के राजनीतिक जीवन की यात्रा 1930 में प्रारम्भ हुई। ब्रिटिश राज के प्रति अपनी पारिवारिक परम्परा को तोड़ते हुए वह तत्कालीन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शमिल हो गयीं। साहित्यिक क्षेत्र में सक्रियता के साथ-साथ देश को स्वतंत्रता प्राप्ति होने तक वह सविनय अवज्ञा आन्दोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनीं।।
समाज सुधारक
वह एक समाज सुधारक थीं और अपनी लेखनी के माध्यम से भी महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार व उत्थान के लिये सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक धरातल पर सुधार का प्रयास करती थीं। उन्होंने गाँवों और पिछड़े क्षेत्रों में बालिकाओं को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण प्रयास किये। आधुनिक भारत के निर्माण में कमला जी का बहुमूल्य योगदान रहा जिसे विस्मृत नहीं किया जा सकता।
संविधान निर्माण में भागीदारी
कमला चौधरी ने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, वह 1947 से 1952 तक संविधान सभा की सक्रिय सदस्य रहीं किन्तु यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को कोई महत्व नहीं दिया गया और वे गुमनाम नायिका बन गयीं।