'द केरल स्टोरी-2': समाज की छिपी परतों को उजागर करती फिल्म

‘जो ताकत मुहब्बत में है, वो बारूद में नहीं। काफिर लड़की सिर्फ एक लड़की नहीं होती है, वह एक पोटेंशियल फैमिली ट्री होती है, उसे वहाँ से तोड़कर, अपने साथ जोड़ लो तो आने वाली पूरी नस्ल बदल जाती है।’ केरल स्टोरी-2 का यह संवाद उन कथित लोगों की मानसिकता को दर्शाने की कोशिश करता है, जो नाम और पहचान बदलकर पहले प्रेमजाल बुनते हैं, विवाह करते हैं और बाद में दबाव व ब्लैकमेल के जरिये अपनी मंशा पूरी करते हैं। कई विवादों और कानूनी प्रक्रिया के बाद फिल्म द केरल स्टोरी-2 सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में लव जिहाद की वास्तविक घटनाओं को केन्द्र में रखते हुए यह दिखाया गया है कि किस तरह पढ़ी-लिखी 16 युवतियों को प्यार, शादी और सुनहरे भविष्य के झाँसे में फँसाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाता है।

फिल्म की कहानी

KERALA THE STORY फिल्म की कहानी केरल, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है। यूपीएससी की तैयारी कर रही केरल की सुरेखा (उल्का गुप्ता) को पत्रकार बनने का नाटक करने वाले कन्वर्जन गिरोह का सलीम (सुमित गहलावत) अपने प्यार के जाल में फँसाता है। मध्य प्रदेश की नेहा (ऐश्वर्या ओझा), जैवलिन के खेल में नेशनल खेलने की तैयारी में है, उसे फैजान (अर्जन सिंह औजला) अपना झूठा नाम राजू बताकर प्यार का झाँसा देता है। वहीं राजस्थान की 16 साल की डॉसिंग इंफ्लूएंसर दिव्या (अदिति भाटिया) को फालोवर्स बढ़ाने का लालच देकर राशिद (युक्ताम खोसला) निकाह कर लेता है। तीनों का ही धर्मांतरण कर उन्हें इस्लाम अपनाने के लिये कहा जाता है। नेहा, नफिसा बन जाती है, दिव्या, आलिया और सुरेखा बन जाती है सलमा। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह भावनात्मक रूप से कमजोर क्षणों का लाभउठाकर लड़कियों का ब्रेनवॉश किया जाता है। निकाह और धर्मांतरण के बाद होने वाले अत्याचारों के दृश्य दर्शकों को झकझोरते हैं।

अभिनय और तकनीकी पक्ष

तीनों अभिनेत्रियों ने अपने किरदारों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव को प्रभावी ढंग से निभाया है। कुल मिलाकर, फिल्म समाज में व्याप्त साजिशों को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करती है और अभिभावकों को सतर्क रहने का सन्देश देती है।

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