आम की फसल के समय भुनगा कीट एक बड़ी समस्या बनते हैं क्योंकि पूरे वर्ष नम वातावरण एवं बारिश से आम की फसल पर आम का फुदका कीट बहुत तेजी से फैलता है। मुख्य रूप से आम का फुदका कीट पूरे भारतवर्ष में अधिक नुकसान पहुँचाने वाला कीट है इसकी तीन जातियाँ पायी जाती हैं। आईडियोसेरस ऐटकिन्ससोनाई, आईडियोसेरस क्लाईपिएलिस एवं आईडियोसेरस नीवियोस्पार्सस प्रमुख है। यह कीट दरारो या पौधों की छाल के नीचे छिपे होते हैं तथा यह कीट पत्तियों के निचली सतह पर अधिक पाये जाते हैं। प्रमुख रूप से यह कीट आम के अलावा नींबू की जातियाँ तथा फाईकस एवं सपोटा में भी पाये जाते हैं। आम की फसल पर या बहुत विनाशकारी कीट है इनके द्वारा होने वाली क्षति का अनुमान विभिन्न राज्यों में 30 से 100% तक लगाया जाता है यह कीट आम की फसल को तीन प्रकार से क्षति पहुँचाते हैं।
1. इस कीट की मादा बौर वाली शाखाओ व फूलों में बड़ी संख्या में अण्डे देती हैं जिससे उनके तन्तुओं को भारी छति पहुँचती है और वह सुख कर गिर जाते हैं।
2. इस कीट के निम्फ व पौढ़ बड़ी संख्या में पौधों की पंक्तियो मुलायम टहनियो एवं फूलों से रस चूसते हैं जिसके परिणाम स्वरुप पौधों की बढ़वार रुक जाती है फूल सूख कर झड़ जाते हैं फलों की संख्या बहुत कम हो जाती है छोटे फलों के डण्ठलों का रस चूसने की वजह से वह भी गिर जातेहैं।
3. यह कीट पत्तियों की सतह पर एक प्रकार का रस स्रावित करते हैं जिसे मधुश्राव कहते हैं यह खाने योग्य नहीं होता। इससे पत्तियों के पृष्ठ भाग पर फफूंदी उग जाती है यह फफूँदी पौधों को भोजन बनाने में बाधा पहुँचती है परिणाम स्वरुप पौधों पर फूल कम लगते हैं और छोटे-छोटे बटन जैसे फल झड़ जाते हैं। मुख्य रूप से इस कीट की मादाएँ अपने अडंरोपक से पत्तियों की मध्य शिराओं फूलों के डण्ठलों तथा फूलों में छेद करके 150 से 300 तक अण्डे एक-एक करके अलग-अलग देती हैं अण्डों से 15 से 20 दिन के बाद नित्य तैयार हो जाते हैं और बसन्त कालीन जीवन चक्र फरवरी से अप्रैल तक और ग्रीष्मकालीन जीवन चक्र जून से अगस्त तक पाया जाता है।
यह अपना जीवन शीतकाल में पौधों की छाल के नीचे छिपकर व्यतीत करते हैं यह नमी और छायादार स्थान अधिक पसन्द करते हैं ऐसे बागों में जो ज्यादा घने होते हैं और जिनमें पानी भरा रहता है इन कीटों का प्रकोप अधिक होता है यदि इनके प्रकोप के समय बादल रहते हैं और पुरवाई हवा चलती है तो इस कीट का अधिक प्रकोप होता है। पिछले दो महीने से मौसम में काफी नमी है जिससे धुंनगा कीट बहुत तेजी से बढ़ रहा है। किसानों को सलाह दी जाती है कि बुप्रोफेजिन (15%) नामक कीटनाशक एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करना चाहिए यह एक अच्छा कीट वृद्धि नियामक (IGR) जो काइटिन संश्लेषण को रोकता है, जिससे निम्फ वयस्क कीटों में परिवर्तित नहीं हो पाते। और धीरे-धीरे कीट मर जाते हैं। इस वृद्धि नियामक के साथ में 1.5 एम एल एसिफेट 35% नामक ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक जो एसिटाइलकोलिनेस्टेरेज को रोकता है, जिससे निम्फ एवं वयस्क कीटों मृत्यु हो जाती है।
छिड़काव करते समय यह अवश्य ध्यान रखें की कीटनाशक सदैव रजिस्टर्ड दुकान से खरीदें। कीटनाशक जब छिड़काव करना हो तभी बनाएं। छिड़काव घोल बनाते समय साफ पानी का प्रयोग करें। काफी दिनों से रखी हुई छिड़काव मशीनों की अच्छी तरीके से सफाई करके ही छिड़काव करें। बाग ज्यादा घना नहीं होना चाहिये बाग को साफ रखना चाहिये और उसमें पानी नहीं रुकने देना चाहिये।
.डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह