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संत ज्ञानेश्वर: अल्पायु में अद्वैत ज्ञान और भक्ति की अद्भुत साधना

संत ज्ञानेश्वर : अल्पायु में अद्वैत ज्ञान और भक्ति की अद्भुत साधना

पंद्रह वर्ष की उम्र में ही कृष्णभक्त और योगी बन चुके भारत के महान् संत एवं मराठी कवि संत ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ई. में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इनके पिता का नाम विट्ठल पंत तथा माता का नाम रुक्मिणी…

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इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

आज बिना इन्टरनेट और कृत्रिम बुद्धि के जीवन की कल्पना करना असम्भव है। इन दोनों ने मिलकर सामान्य जीवन को पहले की तुलना में सरल कर दिया है। पहले जिन कामों में घण्टों लगा करते थे, वे अब एक क्लिक में हो जाते हैं। दैनिक जीवन की आवश्यकताओं, नागरिक प्रशासन, शिक्षा, व्यवसाय, चिकित्सा, न्यायिक प्रक्रिया,…

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अमेरिका में हिन्दू दर्शन – जन्मभूमि के मूल्यों के साथ कर्मभूमि में कार्य करें

29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित मेडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम विराट था, भव्य था, दिव्य था, अद्भुत था, अवर्णनीय था..! प्रस॔ग था, ‘एक विश्व – एक मानवता उत्सव’ (Universal Oneness Celebration)। मेडिसन स्क्वायर गार्डन के इंफोसिस थिएटर की अधिकतम आसन क्षमता 5,570 है। यह विशाल सभागार पूरा भरा हुआ था। अनेक आगंतुक/आमंत्रित…

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विवेकानन्द केन्द्र के अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्ण जी को विनम्र श्रद्धांजलि

विवेकानन्द केन्द्र के अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्ण जी कर्मयोग की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन स्वामी विवेकानन्द जी के विश्वबंधुत्व एवं सहिष्णुता के संदेश के प्रसार तथा राष्ट्र एवं समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। बालकृष्ण जी का सरल जीवन, निःस्वार्थ सेवा, त्याग एवं हिन्दुत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा भारतवासियों के…

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संस्कृत भाषा के दस महान कवि

संस्कृत भाषा के दस महान कवि

संस्कृत को भारत की सबसे प्राचीन और देवभाषा कहा जाता है। चारों वेद, रामायण, महाभारत जैसे अनेक हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ संस्कृत में ही रचे गए। संस्कृत को कई भारतीय भाषाओं की जननी भी माना जाता है। आज हम ऐसे ही कुछ प्रमुख संस्कृत कवियों और लेखकों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने इस समृद्ध भाषा को…

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चित्तौड़ का पहला जौहर

चित्तौड़ का पहला जौहर

मर्यादा की रानी वह, पद्मिनी नाम महान, अग्नि-ज्योति बन चमकीं, स्वाभिमान की पहचान। चित्तौड़ की शिरोरेखा, पद्मिनी का मान, देह जली पर अमर रहा, उनका गौरव-गान। जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। भारतीय इतिहास में कई ऐसे अवसरों का व्याख्यान है जब जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की…

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युवाओं को बाइनरी सोच से बाहर निकलकर व्यापक दृष्टि अपनानी चाहिए : सुनील आम्बेकर जी

युवाओं को बाइनरी सोच से बाहर निकलकर व्यापक दृष्टि अपनानी चाहिए : सुनील आम्बेकर जी

कानपुर, 25 अगस्त 2026। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में मंगलवार को ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों द्वारा भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि,…

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एकनाथ रानाडेः वैचारिक दृढ़ता और व्यवहार की सहजता

एकनाथ रानाडेः वैचारिक दृढ़ता और व्यवहार की सहजता

भारत के दक्षिणी छोर पर तीनों महासागरों के संगमस्थल कन्याकुमारी में स्थित श्रीपाद शिला केवल एक शिला नहीं है। वह स्वामी विवेकानंद के जीवन की उस निर्णायक साधना की साक्षी है, जब परिव्राजक के रूप में संपूर्ण भारत का भ्रमण करने के बाद वे तीन दिन और तीन रात उस शिला पर ध्यानस्थ रहे। मानों…

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एक सैनिक की आँखों में बसा विभाजन का दर्द

एक सैनिक की आँखों में बसा विभाजन का दर्द

कृष्णनन्द सागर मेरे एक मित्र श्री विजयेद्रनाथ शर्मा की बेटी की शादी में श्री अर्जुन देव रौली से भेंट हुई। भारतीय वायुसेना से ग्रुप कैप्टन के पद से अवकाश प्राप्त रौली जी ने मेरे प्रश्नों के उत्तर में बहुत संक्षिप्त रूप में केवल इतना ही कहा। इससे अधिक वे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं…

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भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है – दत्तात्रेय होसबाले जी

भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है – दत्तात्रेय होसबाले जी

गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया। भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026। भुवनेश्वर स्थित रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है कि…

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