डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार: सार्वजनिक कार्य का अनुभव
उस समय कलकत्ता क्रान्तिकारी आन्दोलन का केन्द्र था। केशवराव हेडगेवार का नागपुर में ही क्रान्तिकारियों से सम्पर्क हो गया था। वह क्रान्तिकारियों के विश्वस्त मण्डल के...
भगवान हनुमान और लक्ष्मण की पावन नगरी लखनऊ के बड़े मंगल भंडारों को ‘हरित और स्वच्छ’ बनाने का संकल्प
लखनऊभगवान हनुमान और लक्ष्मण की इस ऐतिहासिक नगरी में जेठ माह के प्रत्येक मंगलवार (बडे मंगल) को होने वाले भंडारों की परंपरा अनूठी और अटूट है।...
संवाद की अनादि परंपरा: प्राचीन भारत से आधुनिक टेलीफोन तक की यात्रा
आज National Telephone Day के अवसर पर जब हम आधुनिक संचार की गति और सुविधा पर गर्व करते हैं, तब यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता...
बाबा साहब अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: सामाजिक समरसता का आधार
सामाजिक समरसता के अग्रदूत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अपनत्व की भावना रखते थे और विश्वास करते थे कि यह संगठन...
रामनगरी होगी बैरियर मुक्त, आवागमन होगा निर्बाध
आम लोगों का दैनिक जीवन नगर के 52 वैरिकेडिंग से लगातार हो रहा था बाधित, वाहन से निकलना था कठिन| अयोध्या रामनगरी बैरियर मुक्त होगी और...
सेवा कार्य में समाज को भी सक्रिय सहभागी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी
पुणे, १६ अप्रैल २०२६।नांदोशी में ‘लता-आशा मंगेशकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस’ के भूमि पूजन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने...
भेदभाव छोड़िए, सबको अपना मानिए- डाॅ. मोहन भागवत जी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत जी ने समाज, राष्ट्र और परिवार से जुड़े कई...
सैनिक शब्द ही रगों में जोश जगाने वाला है – राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के 26वें वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ जयपुर, 20 दिसंबर 2025। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सैनिक कभी पूर्व नहीं...
1965 के युद्ध में जब शास्त्रीजी ने मांगी थी गुरु गोलवलकर जी से सहायता
एक दोपहर गुरु गोलवलकर जी भोजन के बाद आराम कर रहे थे. तभी एक संदेशवाहक आया और उनसे कहा कि वे जल्द से जल्द प्रधानमंत्री कार्यालय...
निष्ठावान सच्चरित्र बनें और राष्ट्रभक्ति करें
मद्रास में विद्यार्थियों का कार्यक्रम था। श्री गुरुजी शिक्षा के विषय में बोल रहे थे। ‘शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना इतना ही नहीं होता।...
