कैप्टन स्मित मच्छार : लहूलुहान शरीर, अडिग हौसला और 174 जिन्दगियों की रक्षा की जंग
एक मुस्लिम कट्टरपंथी पायलट हमास अल हमामी के आतंकी प्रयास को असफल करने वाले फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार का साहस भारतीयों की सदियों से चली आ रही साहसी वीरगाथाओं का एक आधुनिक अध्याय बन गया है। कैप्टन का पूरा संघर्ष उनकी मजबूत इच्छाशक्ति, वसुधैव कुटुम्बकम्ा् वाले ध्येय विचार और बहादुरी की परम्परा की एक नयी मिसाल है। वहीं, देश-दुनिया में भारतीयों के लिये सम्मान का परिचायक भी बन गया। कैप्टन मच्छार ने दिखा दिया कि विकट परिस्थियों में भी एक हिन्दू की उपस्थिति सभी की सुरक्षा की गारण्टी है। हालाँकि, भारतीयता के परचम में भी फायदा और नुकसान देखकर बयानबाजी करने वालों को भी इस घटना ने उजागर कर दिया है।
कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनमें किसी व्यक्ति का साहस उसकी राष्ट्रीयता, धर्म और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर मानवता का प्रतीक बन जाता है। 30 सितम्बर, 2026 को दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई घटना भी ऐसी ही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान सामान्य थी, लेकिन कॉकपिट में सह-पायलट हमाम अल-हमामी के हमले ने कुछ ही पलों में इसे भयावह संकट में बदल दिया।
भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने हमला किया। गम्भीर रूप से घायल होने और खून से लथपथ होकर गिर पड़ने के बावजूद उन्होंने विमान में सवार लोगों की जान बचाने की कोशिश नहीं छोड़ी। उनकी निर्णायक कार्रवाई ने यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित पायलटों को कॉकपिट तक पहुँचने और हमलावर को काबू करने का अवसर दिया। अन्ततः विमान की सऊदी अरब के तबुक में आपातकालीन लैण्डिंग करानी पड़ी और एक सम्भावित बड़ी त्रासदी टल गयी।
जब जिन्दगी और मौत के बीच खड़े थे कैप्टन मच्छार
उड़ान के दौरान शुरुआत में सब-कुछ सामान्य था। जाँच एजेंसियों के अनुसार, ओमान के नागरिक सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छार पर हैमर से हमला किया। इस हमले में कैप्टन को सिर, गर्दन और हाथों पर गम्भीर चोटें आयीं। विमान तेजी से नीचे गिरने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गयी। इस बीच विमान लगभग 34 हजार फीट की ऊँचायी पर उड़ रहा था। घटना के दौरान उसकी ऊँचायी में बेहद तेजी से गिरावट आयी। यात्रियों के लिये यह समझ पाना भी मुश्किल था कि आखिर हो क्या रहा है। इसके बाद भारतीय ने अपना दायित्व समझते हुए हर सम्भव खतरे को पटखनी देते हुए एक बड़ी तबाही को रोक लिया।
इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। दो अन्य पायलटों ने विमान को स्थिर करने और नियंत्रण सम्भालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इस दौरान इजरायली दन्त चिकित्सक डॉ. शोता मुसायेव ने घायल कैप्टन को प्राथमिक उपचार दिया। उन्होंने कपड़ों से घावों पर दबाव बनाकर खून रोकने की कोशिश की और कैप्टन को होश में बनाये रखने के लिये लगातार उनसे बात करते रहे। काफी परेशानियों का सामना करते हुए विमान को अन्ततः सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया। कैप्टन को अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में संयुक्त अरब अमीरात में उनका उपचार जारी रहा। यानी एक घायल भारतीय ने मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर जब दरवाजा खोला तो यात्रियों, फ्लाइट क्रू के सदस्यों और उसमें सवार दो अन्य पायलट, जो अवकाश पर थे, सबने सामूहिक तत्परता दिखाते हुए एक भयावह आतंकी वारदात को टाल दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सन्देश और भारत की प्रतिक्रिया

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी को असाधारण साहस का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कैप्टन ने अपनी जान की परवाह किये बिना यात्रियों को बचाने के लिये संघर्ष किया और एक अन्य 9/11 जैसी घटना को रोकने में भूमिका निभायी। इसी क्रम में 2 अक्टूबर को गाँधी जयन्ती के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार से वीडियो कॉल पर बातचीत भी की। उन्होंने उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और कहा कि पूरा देश उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। प्रधानमंत्री की इस प्रतिक्रिया का महत्व केवल इसलिये नहीं है कि एक भारतीय नागरिक की वैश्विक स्तर पर प्रशंसा हुई। इसका महत्व इसलिये भी है कि यह सन्देश दिया गया कि किसी पेशे में कर्तव्य के प्रति निष्ठा और संकट में साहस राष्ट्रीय गौरव का विषय है।
कांग्रेस पर उठे सवाल
कैप्टन मच्छार की घटना के बाद भारत में राजनीतिक बहस भी शुरू हुई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दलों ने एक भारतीय नागरिक की बहादुरी को पर्याप्त महत्व दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के प्रमुख नेताओं ने कैप्टन की बहादुरी की खुलकर प्रशंसा नहीं की। उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक कारण होने का आरोप भी लगाया। विश्व हिन्दू परिषद की ओर से भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की कथित चुप्पी को लेकर सवाल उठाये गये। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कप्तान की बहादुरी की देश-दुनिया में सराहना हो रही है, पर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चुप है। उन्होंने इस चुप्पी को वोट बैंक खोने के डर से जोड़ा। उन्होंने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा का नाम लेकर कहा कि गाजा जैसे मुद्दों पर बोलने वाले नेता भारतीय कप्तान के शौर्य पर कुछ नहीं बोले।

वामपंथी समूहों ने इजरायल को संदेह की नजर से देखा
इस घटना के बाद इजरायल से जुड़ी राजनीतिक बहस को लेकर भी चर्चा हुई। भारत में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर अलग-अलग विचारधाराओं के बीच लम्बे समय से मतभेद रहे हैं। वामपंथी दलों और समूहों का एक हिस्सा फिलिस्तीन के अधिकारों तथा इजरायल की सैन्य नीतियों की आलोचना करता रहा है। हालाँकि, वह इजरायल पर फिलिस्तीन में पाले गये हमास आतंकियों की वारदातों पर चुप्पी साध लेता है। इस मामले में भी यही हुआ, अलकायदा की आतंकी विचारधारा से प्रेरित होकर भटका हुआ सह-पायलट हमाम अल-हमामी की इस आतंकी कायरता पर दो शब्द बोलने से भी पीछे रह गये।
द्वितीय विश्वयुद्ध में गौरवगाथा
कैप्टन मच्छार की बहादुरी को भारतीयों की ऐतिहासिक वीरता के व्यापक सन्दर्भ में भी देखा जा सकता है। द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना ने मित्र राष्ट्रों की ओर से अनेक मोर्चों पर लड़ायी लड़ी। उस समय भारत स्वतंत्र नहीं था, फिर भी भारतीय सैनिकों ने यूरोप, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न युद्धक्षेत्रों में उल्लेखनीय साहस दिखाया।
सम्मान का वास्तविक अर्थ है वीरता के साथ जिम्मेदारी
कैप्टन स्मित मच्छार की घटना ने भारत और इजरायल के लोगों को एक साझा मानवीय अनुभव से जोड़ा। भारत के प्रधानमंत्री ने उनके साहस की प्रशंसा की, इजरायल के प्रधानमंत्री ने उन्हें नायक बताया, दुबई के प्रिंस मिलने गये और इजरायल के राजदूत ने उनके सम्मान की बात कही। अन्तरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जो सदैव एक गौरवगाथा की तरह याद किया जाएगा। हालांकि, सम्मान केवल बयानों और प्रशस्तियों तक सीमित नहीं होना चाहिये। विमानन कम्पनियों, सुरक्षा नियामकों और जाँच एजेंसियों को इस घटना से सबक लेते हुए कॉकपिट सुरक्षा, क्रू सदस्यों की तैयारी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और मानसिक स्वास्थ्य जाँच जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिये। कैप्टन मच्छार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अत्यन्त कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने अपने कर्तव्य से मुँह नहीं मोड़ा। उन्होंने घायल अवस्था में भी वह कदम उठाया, जिसने दूसरों को हस्तक्षेप का अवसर दिया। यात्रियों, अन्य पायलटों और चिकित्सकीय सहायता देने वाले व्यक्ति ने भी उसी संकट में अपनी जिम्मेदारी निभाई।
कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी हमें बताती है कि असली वीरता का परिचय तब मिलता है, जब व्यक्ति के सामने अपनी जान बचाने और दूसरों की रक्षा करने के बीच कठिन फैसला लेने का क्षण आता है। यह किसी राजनीतिक दल, धर्म या देश की सीमा में कैद होने वाली कहानी नहीं है। यह साहस, कर्तव्य और मानवता की कहानी है और इसी रूप में इसे याद किया जाना चाहिये। विरोधी दलों को भी इसमें कोई समुदाय विशेष का चेहरा देखते हुए बयानबाजी का अवसर नहीं तलाशना चाहिए। भारतीय जानते ही उसे वह सम्मान देना चाहिये, जिसका वह अधिकारी है। l
9/11 जैसी साजिश थी?
अमेरिका में 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकी हमलों ने पूरी दुनिया की विमानन सुरक्षा को बदल दिया था। अपहृत विमानों को हथियार की तरह इस्तेमाल करके हजारों लोगों की जान ली गयी थी। इसके बाद कॉकपिट के दरवाजों को मजबूत करने और विमान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को सख्त बनाने जैसे कदम उठाये गये। फ्लाई दुबई की उड़ान में हुई घटना ने एक बार फिर उस भयावह सम्भावना की याद दिला दी कि यदि विमान के नियंत्रण पर बैठे व्यक्ति को ही हमलावर बना दिया जाये तो खतरा कितना बड़ा हो सकता है।
अक्टूबर 2026 में सामने आयी जाँच सम्बन्धी जानकारी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के अभियोजकों ने आरोप लगाया कि सह-पायलट विमान को इजरायल के प्रमुख हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल से टकराने की योजना बना रहा था। जाँचकर्ताओं ने इसे 9/11 जैसी वारदात से प्रेरित प्रयास बताया। इन आरोपों और जाँच के निष्कर्षों को आधिकारिक जाँच के सन्दर्भ में ही देखना चाहिये।
इस मामले में कैप्टन मच्छार का साहस इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपनी जान बचाने के साथ-साथ विमान में मौजूद अन्य लोगों को बचाने के लिये भी निर्णायक कदम उठाया था। यदि कॉकपिट का दरवाजा नहीं खुलता और दूसरे पायलटों तथा यात्रियों को हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलता, तो परिणाम कहीं अधिक गम्भीर हो सकते थे। यह घटना विमानन कम्पनियों और नियामक संस्थाओं के लिये भी एक महत्वपूर्ण सवाल छोड़ती है कि क्या मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था किसी ऐसे हमले को रोकने के लिये पर्याप्त है, जिसमें कॉकपिट के भीतर मौजूद व्यक्ति ही खतरा बन जाये?
हनुमान चालीसा से मिला साहस
कैप्टन मच्छार ने बाद में बताया कि हमले के शुरुआती क्षणों में उनकी नजर धुँधली हो गयी थी। वह हमलावर को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गम्भीर चोटों के कारण उनके लिये खड़ा होना भी मुश्किल हो गया था। इसी बीच उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है। यहीं उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरी घटना की दिशा बदल दी। गम्भीर चोटों के बावजूद उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इससे यात्रियों और विमान में यात्रा कर रहे दो अन्य पायलटों को अन्दर पहुँचने का मौका मिला। उन्होंने इस बारे में बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि उस पल वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।

इजरायल की प्रतिक्रिया, भारतीय पायलट के साहस को सलाम
चूँकि, विमान इजरायल जा रहा था और उसमें बड़ी संख्या में इजरायली यात्री सवार थे, इसलिये इस घटना पर वहाँ की सरकार और समाज की विशेष प्रतिक्रिया सामने आयी…
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने उन्हें भारत और इजरायल के बहादुर लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया का नायक बताया। नेतन्याहू ने कैप्टन से बातचीत के दौरान उनके साहस और यात्रियों की रक्षा के लिये किये गये प्रयासों की प्रशंसा की। इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हमले का मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों तथा चालक दल को हमलावर पर काबू पाने में मदद की। इजरायल के भारत में राजदूत रूवेन अजार ने भी कैप्टन के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इजरायल उन लोगों को नहीं भूलता, जो संकट के समय उसकी सहायता करते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कैप्टन मच्छार की बहादुरी को सम्मानित करने का उचित तरीका तलाशा जायेगा। इसी बीच नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिये आमंत्रित करने की बात भी कही, जो हर भारतीय के लिये गौरव का क्षण बनेगा। वहीं, भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से अस्पताल में मिलने दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी पहुँचे थे। अबू धाबी के एक अस्पताल में हुई इस मुलाकात के दौरान, शेख हमदान ने कैप्टन को गले लगाया, उनका माथा चूमा और उनके असाधारण साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन की रक्षा करने के जज्बे की दिल खोलकर तारीफ की। इस अवसर पर उन्होंने भारत का नाम भी गौरव के साथ लिया।
भारतीय सैनिकों की गौरवगाथा के कुछ प्रमुख तथ्य…
- उत्तर अफ्रीका का मोर्चा : भारतीय सैनिकों ने उत्तरी अफ्रीका में धुरी राष्ट्रों की सेनाओं के विरुद्ध लड़ायी लड़ी और कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में सैन्य अभियान चलाये। (स्रोत: भारत के रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक सैन्य इतिहास; ऑक्सफोर्ड अकादमी- द इण्डियन आर्मी इन अफ्रीका एण्ड इटली)
- इटली का अभियान : भारतीय डिवीजनों ने इटली में मित्र राष्ट्रों के अभियान में भाग लिया। पहाड़ी इलाकों में लड़ायी, खराब मौसम और मजबूत दुश्मन ठिकानों के बावजूद सैनिकों ने सन्घर्ष किया। (स्रोत: रक्षा मंत्रालय, भारत – द कैम्पेन इन इटली, 1943-45)
- बर्मा और पूर्वोत्तर का मोर्चा : जापानी सेनाओं के खिलाफ बर्मा अभियान में भारतीय सैनिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इम्फाल और कोहिमा की लड़ाइयाँ जापानी विस्तार को रोकने वाले निर्णायक अभियानों में गिनी जाती हैं। (स्रोत: रक्षा मंत्रालय, भारत – द रिकॉन्क्वेस्ट ऑफ बर्मा, 1944-45)
- भारतीय वायुसेना का योगदान : उस समय की भारतीय वायुसेना ने टोही, संचार, परिवहन और युद्धक अभियानों में भाग लिया। भारतीय वायुसैनिकों ने तेजी से विकसित हो रहे सैन्य विमानन क्षेत्र में अनुभव अर्जित किया। (स्रोत: भारतीय वायुसेना का आधिकारिक इतिहास; रक्षा मंत्रालय – हिस्ट्री ऑफ द इंडियन एअर फोर्स, 1933-45)
- भारतीय नौसेना की भूमिका : रॉयल इण्डियन नेवी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, गश्त और युद्धकालीन परिवहन में योगदान दिया।
(स्रोत: रक्षा मंत्रालय, भारत – द रॉयल इण्डियन नेवी, 1939-45)
- विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित सैनिक : भारतीय सैनिकों को असाधारण वीरता के लिये अनेक सैन्य सम्मान मिले। कई सैनिकों को विक्टोरिया क्रॉस से भी सम्मानित किया गया। (स्रोत: ब्रिटेन का नेशनल आर्मी म्यूजियम – विक्टोरिया क्रॉस; द्वितीय विश्वयुद्ध के सैन्य अभिलेख)
- मानवीय योगदान : भारतीय सैनिकों के अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, श्रमिकों और परिवहन कर्मियों ने भी युद्धकाल में महत्वपूर्ण सेवाएँ दीं। युद्ध की कीमत केवल मोर्चे पर लड़ने वालों ने ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और समाज ने भी चुकाई। (स्रोत: वेलकम कलेक्शन – ऑफिशियल हिस्ट्री ऑफ द इंडियन आर्म्ड फोर्सेस : मेडिकल सर्विसेस)
- युद्ध की विरासत : भारतीय सैनिकों का योगदान इस तथ्य की याद दिलाता है कि साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा भारत के आधुनिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय रहे हैं। (स्रोत: ऑक्सफोर्ड अकादमिक- इण्डियन आर्मी इन वर्ल्ड वॉर टू; भारत के रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक सैन्य इतिहास)
- मानवीय योगदान एवं विरासत : भारतीय सैनिकों के अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, श्रमिकों और परिवहन कर्मियों ने भी युद्धकाल में महत्वपूर्ण सेवाएँ दीं। युद्ध की कीमत केवल मोर्चे पर लड़ने वालों ने ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और समाज ने भी चुकायी। वहीं, भारतीय सैनिकों का योगदान इस तथ्य की याद दिलाता है कि साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा भारत के आधुनिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय रहे हैं। l