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भारत का सर्वांगीण विकास समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव – डॉ. मोहन भागवत जी

भारत का सर्वांगीण विकास समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव – डॉ. मोहन भागवत जी

लुधियाना, 26 फरवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी तीन दिवसीय पंजाब प्रवास के अंर्तगत आज लुधियाना पहुंचे। उन्होंने श्री अरविंदो कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट (SACCM) के ऑडिटोरियम में आयोजित गोष्ठी में प्रमुख नागरिकों के समूह के साथ संवाद किया।

पंजाब प्रदेश से विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 800 प्रमुख नागरिकों ने गोष्ठी में भाग लिया, जिसमें सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग, प्रसिद्ध चिकित्सक, धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग, सिने जगत, मीडिया क्षेत्र, प्रसिद्ध उद्योगपति, साइंटिस्ट, अकादमिक जगत, राज परिवार से जुड़े व्यक्तियों एवं कुछ विशेष प्रतिभाशाली युवा शामिल हुए। इन सब में बहुत बड़ी संख्या में मातृशक्ति भी उपस्थित रही।

सरसंघचालक जी ने मुख्यत: संघ स्थापना की पृष्ठभूमि, संघ का क्रमिक विकास, संघ की कार्य पद्धति एवं देश के सर्वांगीण विकास जैसे प्रमुख विषयों पर संवाद किया।

उन्होंने इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि बाहर से मुट्ठी भर लोग आते थे और हम पर शासन करते थे। इसका मूल कारण यह था कि हमारा समाज संगठित नहीं था। आज जब हमारा देश आजाद है तो हमारा लक्ष्य है, अपने देश का सर्वांगीण विकास करना, जो समाज के सभी वर्गों की सक्रियता एवं सभी वर्गों को साथ लेकर ही संभव है।

उन्होंने कहा कि जब हम समाज को संगठित करने की बात करते हैं तो इसका मतलब सभी 142 करोड़ लोगों से है जो भारत में रहते हैं। सबका सम्मान करना ही भारतीय दृष्टि है। विभिन्न मत, पंथ एवं संप्रदायों के प्रश्न पर सरसंघचालक जी ने कहा की सभी को जाना एक ही जगह है, रास्ता अलग-अलग हो सकता है। अपने रास्ते पर पक्का रहो और बाकी सब के रास्ते का भी सम्मान करो।

उन्होंने पंच परिवर्तन के विषय (सामाजिक समरसता, पर्यावरण, परिवार जीवन मूल्य, स्व बोध, एवं नागरिक कर्तव्य) हमारे आचरण में आएं, इसका आग्रह किया।

पर्यावरण के विषय पर बात करते हुए श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का जिक्र किया, जैसे “पवन गुरु पानी पिता माता धरत महत”।

उन्होंने कहा कि संघ देश के लिए है, खुद के लिए नहीं। जब हम कहते हैं संघ कार्य, इसका अर्थ है – देश एवं समाज का कार्य, किसी संस्था का कार्य नहीं।

आज के इस संवाद कार्यक्रम में जिज्ञासा समाधान के विषय को भी जोड़ा गया था। जिसमें देश समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का सरसंघचालक जी ने विस्तार पूर्वक उत्तर दिया।

गोष्ठी के दौरान मंच पर सरसंघचालक जी के साथ पंजाब प्रांत संघचालक सरदार इकबाल सिंह जी भी विराजमान रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ।

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