आम लोगों का दैनिक जीवन नगर के 52 वैरिकेडिंग से लगातार हो रहा था बाधित, वाहन से निकलना था कठिन|

अयोध्या रामनगरी बैरियर मुक्त होगी और आवागमन निर्बाध होगा। नगरी की सुरक्षा व्यवस्था विभिन्न नाका-नुक्कड़ों पर स्थापित 52 बैरियरों और चार वाच टावरों से संचालित है। यद्यपि यह नगरी की सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता एवं सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के सुझाव के अनुरूप है, किंतु इस व्यवस्था के चलते प्रायः नागरिक स्वायत्तता प्रभावित होने की चिंता भी व्यक्त होती रहती है। अति संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था के चलते न केवल दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को जगह-जगह रोक-टोक का सामना करना पड़ता है, बल्कि स्थानीय नागरिकों का नित्य का आवागमन भी यत्र-तत्र प्रतिबंधित होता है।

रामजन्मभूमि परिसर को छोड़ कर पैदल आवागमन तो शायद ही कहीं प्रतिबंधित हो, किंतु वाहन (विशेष रूप से चारपहिया) के साथ पहुंचना अग्नि परीक्षा के समान होता है। आज जब रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का महनीय अभियान पूर्ण होने के साथ रामनगरी को श्रेष्ठतम वैश्विक नगरी बनाए जाने के अभियान को अंतिम स्पर्श मिल रहा है, तब शासन-प्रशासन अधिकाधिक ढील के साथ श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को आवागमन संबंधी सुविधा और स्वायत्तता प्रदान करने के प्रयोग की तैयारी कर रहा है। पुलिस
क्षेत्राधिकारी के अनुसार बैरियर तो फिलहाल रहेंगे, किंतु उन पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ यात्री वाहनों के आवागमन की भी छूट होगी। वह बताते हैं कि पहले भी जरूरत के हिसाब से ही बैरियरों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाता था और अब नए सिरे से समीक्षा के बाद वाहनों के आवागमन से जुड़ी स्वतंत्रता मेंकुछ और वृद्धि होगी।

परिक्रमा मार्ग पर चलेंगी बसें

प्रतिबंधों में ढील के साथ यातायात से जुड़ी सुविधाओं में वृद्धि की भी तैयारी हो रही है। परिवहन निगम कुछ ऐसी बसें संचालित करने की कोशिश कर रहा है, जो रामनगरी की पंचकोसी परिधि को परिवहन सेवा से आच्छादित कर सकें। फिलहाल दो नई बसें संचालित किए जाने की योजना है। एक बस ऋणमोचनघाट परिक्रमा मार्ग नुक्कड़ पर स्थित कंचन भवन से गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड, प्रह्लादघाट होती हुई उदया स्कूल तक संचालित होकर आधे परिक्रमा मार्ग को तृप्त करेगी और दूसरी बस हनुमान गुफा, दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय, रामघाट चौराहा, हलकारा का पुरवा उपरिगामी सेतु से उदया चौराहा के बीच के मार्ग से गुजरेगी।

बदलाव के पीछे महांत आचार्य मिथिलेशनंदिनी का वक्तव्य !

यातायात को सुगम बनाने की पहल प्रतिष्ठित पीठ हनुमन्निवास के महांत एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपने चिंतन और वक्तृत्व की छाप छोड़ रहे आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण के इंटरनेट मीडिया पर प्रसारितवक्तव्य से जोड़कर देखी जा रही है। महांत ने यह वक्तव्य दिल्ली में आयोजित अयोध्या पर्व के दौरान शासन-सत्ता और अयोध्या को उच्चीकृत किए जाने वाले दावे में शामिल लोगों के बीच दिया था। इसमें उन्होंने बड़े सलीके से विकास और बदलाव के साथ अयोध्या के हिस्से आई समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था।

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