सुभाष चन्द्र
SIR पर जस्टिस भुईया का बयान उन्हें पागल साबित करने के लिए काफी है – जिस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेंच शुरू से वैध करार दिया है, उस पर जस्टिस भुईया ने कहा है कि “कोई भी ऐसी प्रक्रिया जो लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करती है, वह मूल रूप से मनमानी व संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है और उसे सही नहीं ठहराया जा सकता”
ऐसे ही विचार घोर हिंदू विरोधी रहे रिटायर्ड जस्टिस नरीमन ने भी व्यक्त किए हैं – कहीं ऐसा तो नहीं है कि CJI सूर्यकांत के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में वैसी ही कुछ साजिश चल रही है जैसी तत्कालीन CJI दिपक मिश्रा के खिलाफ 12 जनवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके की थी –
जस्टिस भुइया लगता है कांग्रेस के लिए पिच तैयार कर रहे हैं, तभी तो कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तपाक से X पर लिखा कि जस्टिस भुईया ने सीईसी को बेनकाब कर दिया –
जस्टिस भुईया क्या चाहते हैं कि जो 2.8 करोड़ लोग मर गए, 6.3 करोड़ जगह छोड़ कर चले गए और एक करोड़ डुप्लीकेट नाम के वोटर थे, उन्हें भी वोटर लिस्ट में रहने दिया जाना चाहिए था –
अभी किसी ने बताया है कि जस्टिस भुईया के पिता सुचेंद्र नाथ भुइया CPI से जुड़े थे – बाद में कांग्रेस राज में वे 1983 – 1986 और 1993 – 1996 असम के एडवोकेट जनरल भी रहे – जस्टिस भुईया स्वयं 2011 में कांग्रेस की असम सरकार में एडवोकेट जनरल रहे –
इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जस्टिस भुइया के दिमाग में वामपंथी और कांग्रेस का कीड़ा क्यों मचल रहा है –
जस्टिस भुईया कई बारे ऐसे बयान देते रहे हैं जिनका कोई औचित्य नहीं है -उनके कुछ बयान बता रहा हूँ –
-उन्होंने कहा विश्वविद्यालय में ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां स्थापित विचारों की जांच की जा सके, उन पर सवाल उठाए जा सके और छात्र मुश्किल सवाल पूछने से नहीं हिचकिचाएं, सवाल पूछने का अधिकार बगावत या अवज्ञा नहीं है और “असहिष्णु मानसिकता” संविधान की भावना के विपरीत है –
-76 वर्षों से कोई भी “Distinguished Jurist” सुप्रीम कोर्ट का जज क्यों नहीं बना जबकि हाई कोर्ट के जज और वकील ही सुप्रीम कोर्ट के जज बनते है (एक दूसरा सिस्टम लागू करना चाहते हैं)
-उन्होंने असहमति जताने पर नागरिकों को गिरफ्तार करने पर भी टिप्प्णी की, -“उदाहरण के लिए, कुछ युवकों का मामला लें, जो गंगा नदी पर नाव में रोजा खोलते समय चिकन बिरयानी खा रहे थे – मुझे पूरा विश्वास है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता – गंगा नदी पर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है – फिर भी उन्हें केवल इसी कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा”-
-उन्होंने कहा कि “UAPA के अत्यधिक उपयोग से हासिल नहीं हो सकता विकसित भारत का लक्ष्य – (तो क्या आतंकियों को भी छोड़ देना चाहिए- यह कानून मोदी ने नहीं बनाया, ये 1967 में बना था)
- “केंद्र के अनुशंसा पर जजों का ट्रांसफर करके न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता – एक जज का केवल इसलिए ट्रांसफर नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ कोई फैसला दिया है क्योंकि उससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता compromise होती है” – (जजों के ट्रांसफर में केंद्र सरकार का कोई रोल नहीं होता – ट्रांसफर केवल कॉलेजियम करता है )
लुटेरो / डकैतों के भी अपने इलाके होते है जहां वो किसी का दखल बर्दाश्त नहीं करते लेकिन वे खुद हर किसी के इलाके में मुंह मारते हैं – SIR से भुईया का कोई लेनादेना नहीं है तो फिर क्यों अपनी मुंडी घुसेड़ रहे है उस मामले में, कांग्रेस के वफादार हैं केवल इसलिए –