सम्‍पादकीय

“राष्ट्रभक्ति के दो ध्रुव: नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. हेडगेवार — दो राहें, एक लक्ष्य” 0

“राष्ट्रभक्ति के दो ध्रुव: नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. हेडगेवार — दो राहें, एक लक्ष्य”

दो महान विद्वान-सह-एक्टिविस्ट, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार समकालीन थे; लेकिन वे क्षेत्र और करियर के मामले में अलग-अलग क्षेत्रों में काम...

नक्सलवादः असंभव मान ली गई समस्या का समाधान बने अमित शाह 0

नक्सलवादः असंभव मान ली गई समस्या का समाधान बने अमित शाह

अब वैचारिक संघर्ष के मोर्चे पर भी दिखानी होगी प्रतिबद्धता लाल आतंक पराभव की ओर है। वर्ष 2025 को माओवाद के सशस्त्र संघर्ष के अंत के...

आरएसएस और कम्युनिस्ट विचार : भारत की आत्मा और आयातित सोच का संघर्ष 0

आरएसएस और कम्युनिस्ट विचार : भारत की आत्मा और आयातित सोच का संघर्ष

के के उपाध्याय भारत के वैचारिक परिदृश्य में एक संघर्ष लंबे समय से जारी है — एक ओर वह संगठन है जिसने राष्ट्रवाद को भारतीय जीवन...

प्रतिबंधों से संघ के कार्यविस्तार को नहीं रोक सकेगी कर्नाटक सरकार 0

प्रतिबंधों से संघ के कार्य विस्तार को नहीं रोक सकेगी कर्नाटक सरकार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो गए हैं। इस संगठन की क्षमता और आन्तरिक ऊर्जा को विश्व ने पहचान लिया है। दुनिया...

मराठी से संस्कृत भाषा में संघ-प्रार्थना के बदलने की कहानी 0

मराठी से संस्कृत भाषा में संघ-प्रार्थना के बदलने की कहानी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने साथियों के साथ मिलकर संघ की नियमित शाखाओं में जन्मभूमि को नमन करती हुई एक...

राष्ट्र चेतना का अवतार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 0

राष्ट्र चेतना का अवतार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्र चेतना का अवतार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघः राष्ट्र आराधना के 100 वर्षध्येय साधना पर अटलः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ -सर्वेश कुमार सिंह- यदा यदा हि...

एक विराट संगठन का छठा महा अभियान 0

एक विराट संगठन का छठा महा अभियान 

नरेन्द्र भदौरिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की यात्रा में कई घुमावदार अवरोधों को बड़े कौशल से पार किया है। इस यात्रा में पाँच बड़े...

'अहम् पितरं सुवे' 'अहं सुवे पितरम्' 0

‘अहम् पितरं सुवे’ ‘अहं सुवे पितरम्’

ऋग्वेद दशम मण्डल ‘देवी-सूक्त’ में यह स्वयं देवी का वचन है। पितृ तत्व नित्य है। यह कोई अनुपस्थित की क्षणिक उपस्थिति नहीं है। यह अस्तित्व के...

दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है। 0

दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा (दूब) की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है, माना जाता है कि यह भगवान विष्णु की जांघ के रोम से निकली...