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गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

आज से ठीक 6 वर्ष पूर्व एक वर्षा-आँधी वाली रात मेरे एक सहयोगी ने मुझे फोन किया और पूछा कि क्या श्री गुरुजी गोलवलकर जी की डॉक्टरी परीक्षा करने का समय दे सकता हूँ। अगले प्रातः मैं उन्हें देखने चल दिया। कार की गति के साथ अनेक विचार भी मेरे मस्तिष्क में दौड़ रहे थे।…

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भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

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लाहौर में हिन्दू नेताओं की बैठक : चौ. छोटूराम की आशंका

जनवरी 1947 में संघ की ओर से लाहौर में हिन्दू ने. ताओं की एक बैठक बुलायी गई थी, जिसमें पंजाब मन्त्रीमण्डल के कई हिन्दू मन्त्री भी उपस्थित थे। उनमें कुछ कांग्रेसी भी थे। इस बैठक में चौधरी छोटूराम ने कहा था- “जब तक यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार है, विभाजन नहीं हो सकता। लेकिन मुझे खतरा…

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विभाजन से पूर्व पंजाब में संघ की निर्णायक तैयारी

विभाजन से पूर्व पंजाब में संघ की निर्णायक तैयारी

कांग्रेस नेता विभाजन को स्वीकार कर लेने वाले हैं अर्थात पाकिस्तान अब बनने ही वाला है, यह जानकारी मिलते ही वसन्तराव जी तुरन्त हवाई जहाज से दिल्ली से नागपुर पहुँचे। वहाँ उन्होंने सरसंघचालक श्री गुरुजी को यह बताया। श्री गुरुजी ने कहा कि “गान्धीजी के होते हुए ऐसा नहीं हो सकता, वे विभाजन कभी स्वीकार…

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मैंने देखा इच्छामरण

मैंने देखा इच्छामरण

सबेरे का समय, चाय-पान का वक्‍त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे कुर्सी पर बैठे थे। चरण स्पर्श के लिए हाथ बढाए। सदैव की भाँति पॉव पीछे खींच लिए। मेरे साथ आए स्वयंसेवकों का परिचय हुआ। उनमें आदिलाबाद के एक डॉक्टर…

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सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के संदर्भ में सेवाकार्य का योगदान अनन्य साधारण है। समाज में कई प्रकार के सेवा के कार्य चलते रहते हैं। उनकी प्रेरणा भी भिन्न-भिन्न प्रकार की रहती है। अनेक सेवाकार्य पुण्य संचय के हेतु से होते हैं। किसी सेवा कार्य की प्रेरणा भूतदया होती है। कई लोग प्रसिद्धि पाने के लिए सेवा कार्य…

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श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

अस्पृश्यता रोग की जड़ जन सामान्य के इस विश्वास में निहित है कि यह धर्म का अंग है और इसका उल्लंघन महापाप होगा। यह विकृत धारणा ही वह मूल कारण है, जिससे शताब्दियों से अनेक समाज- सुधारकों, धर्माचार्यों के समर्पित प्रयासों के बाद भी यह घातक परम्परा जनसामान्य के मन में आज भी घर किए…

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श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है? अथवा मनुष्य अपने सामने जीवन का लक्ष्य कौन सा रखे? इस बारे में लगभग सभी लोगों का मत है कि सुख ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य है। परंतु, प्रश्न यह है कि सुख से आशय क्या है और मनुष्य को यह सुख कैसे मिल सकता है? इस सम्बन्ध में…

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दादा लाड और भारतभूषण दास जी महाराज को मिलेगा ‘पूजनीय श्री गुरुजी पुरस्कार’

दादा लाड और भारतभूषण दास जी महाराज को मिलेगा ‘पूजनीय श्री गुरुजी पुरस्कार’

पुणे, 4 फरवरी 2026। कृषिभूषण श्रीरंग देवबा लाड (दादा) और वाराणसी के आचार्य श्री महंत भारतभूषण दास जी महाराज को इस वर्ष का ‘पूजनीय श्री गुरुजी पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनकल्याण समिति’ द्वारा यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक मा. स. गोलवलकर (श्री…

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हम सभी श्रद्धापूर्वक मातृभूमि की महिमा का गायन करें

हम सभी श्रद्धापूर्वक मातृभूमि की महिमा का गायन करें

अपनी भूमि हमें मातृभूमि लगनी चाहिए। उसका कण-कण हमें पवित्र लगना चाहिए। हमारी मातृभूमि, कोई मिट्टी का ढेर नहीं, वह जड़ या अचेतन नहीं, ऐसी हमारी भावना चाहिये। इस प्रकार की जिनकी भावना और श्रद्धा रहेगी, उनका ही ‘राष्ट्र’ बनेगा और वे ही राष्ट्रीय कहलाए जाएंगे, यह सत्य श्री गुरुजी ने बहुत स्पष्ट शब्दों में…

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