धर्म, अध्यात्म और ज्ञान रूपी त्रिवेणी की प्रवाहिका काशी की यात्रा केवल एक भौगोलिक भ्रमण नहीं अपितु अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव है। काशी जिसे वाराणसी, बनारस, आनंदवन इत्यादि कई नामों से अभिहित किया जाता है, भारत की धार्मिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक तथा – विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरियों में अग्रगण्य यह नगरी अनादिकाल से धर्म, दर्शन, साहित्य, संगीत और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रही है।
एक विचारक के रूप में निर्विकार भाव से जब मैं यहां पहुंचा तो प्रथम दृष्टि में ही इसकी सांस्कृतिक समुत्कर्षता और आध्यात्मिक गंभीरता का अनुभव हुआ। प्रातःकाल गंगा तट के घाटों से यहां की अतिगहन गलियों का दृश्य अनायास हृदय का हरण कर रहा था। इन गलियों की बनावट इस नगरी की प्राचीनता को प्रतिबिबिंत करती है। घाटों से होते हुए जैसे ही मैं दशाश्वमेध घाट पहुंचा, पूर्व दिशा से उदित होते सूर्य की स्वर्णिम किरणें गंगा की लहरों पर प्रतिबिंबित हो रही थी वैदिक मंत्रोच्चार, मंदिरों की घंटियां और श्रद्धालुओं की आस्था मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित कर रहे थे, मानो समस्त प्रकृति नगर के अधिष्ठाता भूतभावन भगवान विश्वनाथ के ध्यान में निमग्न हो।
गंगा आरती का दिव्य दृश्य मन को अलौकिक शांति प्रदान कर था। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करते समय शिवतत्व की व्यापकता का बोध होता है। यहां आकर यह अनुभव होता है कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्म केवल उपासना नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है और महाकवि श्रीहर्ष का वह वचन सत्य प्रतीत होता है जिसमें उन्होंने कहा है कि काशी में वास करना स्वर्ग में वास करना है। अतएव यहां शरीर त्यागने वालों को मुक्ति मिलती है।
विविध मठों और आश्रमों में चलने वाले वेद, उपनिषद, दर्शन और योग एवं आयुर्वेद के अध्ययन से यह स्पष्ट हो रहा था कि काशी ज्ञान और साधना की समन्वित भूमि है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का विशाल परिसर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान का संगम प्रस्तुत करता है। काशी की सांस्कृतिक धारा भी उतनी ही समृद्ध है। यहां की संगीत परंपरा, विशेषकर बनारस घराना, भारतीय शास्त्रीय संगीत को विशिष्ट पहचान देता है। लोकजीवन में भी आध्यात्मिकता रची-बसी है, चाय की दुकानों पर दार्शनिक एवं राजनैतिक चर्चाएं, घाटों पर साधुओं का चिंतन और आम जनजीवन में सहज धार्मिकता काशी को अद्वितीय बनाती है। यहां जीवन और मृत्यु के दार्शनिक सत्य का भी गहरा बोध होता है।
समग्रतः काशी की मेरी यात्रा आत्मा, बुद्धि और हृदय तीनों को स्पर्श करने वाली अनुभूति है यह नगरी केवल तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवित पाठशाला है, जहां अध्यात्म व्यवहार से जुड़ता है और शिक्षा संस्कृति से। एक अन्वेषक के दृष्टिकोण से विचार करने पर काशी का अनुभव यह सिखाता है कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य मानवता का उन्नयन और आत्मबोध की प्राप्ति है।
लेखक – डा. शिवकुमार शर्मा (विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री हैं।)