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वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार

भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक चेतनत्त्व के पटल पर भगवान वामन का स्वरूप केवल दशावतार रूपी परम्परा में एक धार्मिक दृष्टि तक ग्रहण करना उनके व्यक्तित्व की व्यापकता एवं विराटता को सीमित कर देना प्रतीत होता है। वामन अनुकृति के अन्तर्गत भारतीय मनीषियों ने स्व मेधा से सत्ता, सामर्थ्य, विनम्रता, आत्मसंयम एवं लोककल्याण के ऐसे गहनतं जीवन-मूल्यों…

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धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत

उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य…

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शिक्षा वह है जो मनुष्य में उचित-अनुचित का विवेक जाग्रत करे - डॉ. मोहन भागवत जी

शिक्षा वह है जो मनुष्य में उचित-अनुचित का विवेक जाग्रत करे – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 1 जुलाई 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने जरीपटका स्थित सिन्धु एजुकेशन सोसायटी के अमृत महोत्सव वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा उपस्थित नागरिकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूर्ण होने का यह उत्सव केवल आनंद मनाने के लिए नहीं, बल्कि इस आनंद के…

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रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

अपने देश के उत्तरी भागों में ‘राखी’ का संकेत बहुत ही सुंदर है। किसी भी अनजाने पुरुष को कोई भी स्त्री जाकर उसके हाथ में राखी बांध देती है तो उसी क्षण से वह पुरुष उसका भाई, उसका रक्षक बन जाता है। और यदि किसी स्त्री के स्त्रीत्व पर संकट आ जाए और वह जाकर…

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काशी की यात्रा अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव

काशी की यात्रा अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव

धर्म, अध्यात्म और ज्ञान रूपी त्रिवेणी की प्रवाहिका काशी की यात्रा केवल एक भौगोलिक भ्रमण नहीं अपितु अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव है। काशी जिसे वाराणसी, बनारस, आनंदवन इत्यादि कई नामों से अभिहित किया जाता है, भारत की धार्मिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक तथा – विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरियों में अग्रगण्य यह नगरी…

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धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव – डॉ. मोहन भागवत जी

चांदवड तहसील के ‘णमोकार’ में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव; विविधता में एकता ही भारत की शक्ति मलसाणे (णमोकार) जिला नासिक, १० फरवरी। मलसाणे (तहसील चांदवड) स्थित ‘णमोकार’ तीर्थक्षेत्र में आयोजित दिगंबर जैन पंथ के अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “धर्म का मार्ग छोड़कर भौतिकवाद…

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धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

ग्रंथ, शास्त्र और संतों की वाणी हमारी समझ और सामर्थ्य को बढ़ाते हैं – आचार्य महाश्रमण जी नागौर, 22 जनवरी 2026। जिले के छोटी खाटू कस्बे में 162वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर विशाल व भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्य महाश्रमण के पावन सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन…

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धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है; हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है भोपाल। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती…

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The Constitution embodies the spirit of taking everyone along – Dr. Mohan Bhagwat ji

संविधान में सभी को साथ लेकर चलने की भावना निहित है – डॉ. मोहन भागवत जी

पट्टी कल्याण, समालखा। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा 05 से 07 दिसंबर 2025 तक माधव सेवा न्यास, पट्टी कल्याण, समालखा (पानीपत) में ‘भारतीय इतिहास, संस्कृति और संविधान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। सरसंघचालक जी भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा ‘जम्मू-काश्मीर-लद्दाख’ पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया। उद्घाटन…

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यह युद्ध धर्म और अधर्म के बीच है – डॉ. मोहन भागवत जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम आपसी मतभेदों में रहते हैं, तो समाज में खाई बढ़ती जाती है।

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