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जैविक खेती को बढ़ावा दें, गांवों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाएं – आलोक कुमार जी

बसेरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के बसेरा में आयोजित “प्रभात ग्राम” विषयक तीन दिवसीय प्रांत स्तरीय कार्यशाला का समापन हुआ। समापन सत्र में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने कहा कि नई पीढ़ी की रुचि और प्रकृति के अनुरूप कार्यों का नियोजन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक अच्छे कार्य को प्रारंभ में विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन बाधाओं को पार करने के बाद सफलता प्राप्त होती है। समाज में परिवर्तन धीरे-धीरे लाने की आवश्यकता है।

आलोक कुमार जी ने कहा कि गांवों के विकास में आधुनिक तकनीक और श्रम का समन्वय जरूरी है। गांव के श्रेष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मान देना चाहिए। ग्राम विकास समिति को सभी सरकारी योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। दिव्यांग, वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य योजनाओं का लाभ भी विकास समिति के माध्यम से पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने गांव की विकास समितियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जिस कार्य में महिलाओं की भागीदारी होती है, वह कार्य तेजी से आगे बढ़ता है। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से गांव के विकास को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने किसानों से जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि अपने परिवार से ही जैविक खेती के लिए प्रेरणा देनी चाहिए। रासायनिक प्रयोगों को धीरे-धीरे कम करते हुए गैर-रासायनिक एवं जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में भारत आत्मनिर्भर था और गांव आधारित अर्थव्यवस्था थी। गांवों में ही अनेक वस्तुओं का निर्माण होता था और उनका निर्यात भी किया जाता था। समय के साथ गांवों की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया और शहरीकरण को बढ़ावा मिला। अब आवश्यकता है कि गांवों को पुराने दौर में ले जाने के बजाय आधुनिक, आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त गांव बनाया जाए।

संघ की प्रभात ग्राम योजना

जिन ग्रामों में अनेक वर्षों तक समाज को साथ लेकर समिति के माध्यम से लगातार सात आयामों (सामाजिक शिक्षा एवं संस्कार, सामाजिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, सामाजिक स्वावलंबन, सामाजिक सुरक्षा, गौ आधारित जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण) पर कार्य कर परिवर्तन किया जाता है, इन आयामों में से चार आयामों पर प्रभावी कार्य होकर आदर्श ग्राम बन जाता है, तब वह प्रांत टोली के निरंतर अवलोकन के बाद प्रभात ग्राम घोषित किया जाता है।

इस कार्यशाला में 30 प्रभात ग्रामों से 205 कार्यकर्ता बंधु भगिनियों ने भाग लिया और सभी का निवास भी गांव के परिवारों में ही था।

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