देसी गाय अपने बछड़े को दूध पिलाकर ममता प्रकट करती हुई।

गोमाता के दूध से होगा पेट के असाध्‍य रोगों का आसान तरीके से उपचार

देश में पहली बार बीएचयू/BHU के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में गैस्ट्रोइंटरोलाजी विभाग ने देसी गाय के दूध में पाये जाने वाले लैक्टोफेरिन का उपयोग शुरू किया है। दो माह से मनुष्यों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है, जिसके शुरुआती परिणाम भी काफी उत्साहवर्धक हैं।

हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं कि अधिकतर बीमारियों की शुरुआत से पेट से ही होती है। इसी दिशा में बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय (बीएचयू) ने एक नया प्रयोग किया है। इसके अंतर्गत पाया गया है कि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) पाचन सम्‍बंधी एक ऐसी बीमारी है, जिससे मनुष्य की आंत प्रभावित होती है। इससे पाचन तंत्र में दीर्घकालिक सूजन की समस्या हो सकती है। इस खतरनाक बीमारी के उपचार के लिए देश में पहली बार बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में गैस्ट्रोइंटरोलाजी विभाग ने देसी गाय के दूध में पाये जाने वाले लैक्टोफेरिन का उपयोग शुरू किया है। दो माह से मनुष्यों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है, जिसके शुरुआती परिणाम भी काफी उत्साहवर्धक हैं।

30 मरीजों का हो रहा लेक्‍टोफेरिन से परीक्षण

इस सम्‍बंध में गैस्ट्रोइंटरोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव ने बताया कि अभी तक यहां 1500 से अधिक मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 30 मरीजों को लेक्टोफेरिन के परीक्षण के लिए चिह्नित किया गया है। 12 मरीजों को बीमारी से जुड़ी दवा के साथ ही कैप्सूल के रूप में लैक्टोफेरिन दी जा रही है। शोध में शामिल डॉक्टर इन मरीजों की सतत निगरानी कर रहे हैं। गाय के दूध में लैक्टोफेरिन की मात्रा करीब 0.2 मिलीग्राम प्रति लीटर होती है। मरीजों पर अध्ययन के लिए विभागीय बजट से गाय के दूध का लेक्टोफेरिन अमेरिका से तैयार करवा कर मंगाया गया है। इन मरीजों को लगातार तीन माह तक कैप्सूल खानी है। परिणाम में पाया गया है कि अभी तक रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और संक्रमण से लड़ने में मदद मिल रही है। एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं की तुलना में पुरुषों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।

भारतीय गाय के दूध से पेट के रोग का ईलाज

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को आइबीडी की समस्या होने का खतरा अधिक होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर शरीर को उन रोगाणुओं से बचाने में मददगार होती है, जो ऐसी बीमारियों और संक्रमण का कारण बनते हैं। ऐसे में देसी गाय का दूध न केवल पोषण का खजाना है, बल्कि यह पेट के रोगों का उपचार करने में भी प्रभावी है। इसकी खासियत है इसमें मौजूद लैक्टोफेरिन, एक शक्तिशाली प्रोटीन, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। भारतीय गायों, जैसे साहिवाल और गिर, के दूध में लैक्टोफेरिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो इसे स्वास्थ्यवर्धक बनाता है।

स्वास्थ्यवर्धक दूध से बीएचयू में हो रहा उपचार

आईबीडी से पीड़ित मरीज की आंतों में सूजन हो जाती है और पाचन तंत्र सम्‍बंधी गम्‍भीर दिक्कतें हो जाती हैं। मरीज को लंबे समय तक दवाएँ खानी होती हैं। इसमें थकान, दस्त, पेट में दर्द और ऐंठन, खून या म्यूकस के साथ दस्त आना, भूख में कमी और आंतों में छाले पड़ जाते हैं। मरीजों में अल्सर के साथ ही एनीमिया, विटामिन बी12, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी हो जाती है, क्योंकि आंतें इन्हें ठीक से अवशोषित नहीं कर पातीं। लंबे समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस रहने पर कोलन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। वर्ष 2021 से बीएचयू में प्रत्येक गुरुवार को देश का चौथा आइबीडी क्लीनिक संचालित किया जा रहा है।

लैक्टोफेरिन के फायदे पेट के रोगियों के लिए : लैक्टोफेरिन एक प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल प्रोटीन है, जो पेट में हानिकारक बैक्टीरिया, जैसे H. पाइलोरी, को खत्म करता है। यह अल्सर, गैस्ट्राइटिस, और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसे पेट के रोगों में राहत देता है। देसी गाय का दूध पीने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, क्योंकि लैक्टोफेरिन आंतों की सूजन को कम करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। एक अध्ययन के अनुसार, लैक्टोफेरिन पेट के कैंसर के जोखिम को भी कम कर सकता है।

कैसे करें उपयोग : देसी गाय का दूध रोजाना सुबह खाली पेट पीने से लैक्टोफेरिन के फायदे अधिक मिलते हैं। इसे हल्का गुनगुना करके पिएं, ताकि पाचन तंत्र पर इसका प्रभाव बढ़े। पेट की बीमारी से जूझ रहे लोग अपने आहार में देसी गाय का दूध नियमित रूप से शामिल करें। साथ ही, डॉक्टर की सलाह लें, खासकर यदि आप गंभीर रोगों से पीड़ित हैं।

क्यों है देसी गाय का दूध खास : भारतीय गाय का दूध अपने प्राकृतिक गुणों के कारण अन्य नस्लों से अलग है। इसमें लैक्टोफेरिन के साथ-साथ अन्य पोषक तत्व, जैसे ओमेगा-3 और विटामिन, भी होते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। यह प्राकृतिक उपचार का एक सरल और प्रभावी तरीका है।

देसी गाय का दूध न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि यह पेट के रोगों का उपचार करने का प्राकृतिक साधन भी है। इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और लैक्टोफेरिन के चमत्कारी लाभों का अनुभव करें।

डॉ आम्‍बेडकर की दृष्टि में ‘हिन्‍दुत्‍व’

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