पुणे, १६ अप्रैल २०२६।
नांदोशी में ‘लता-आशा मंगेशकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस’ के भूमि पूजन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि निःस्वार्थ बुद्धि और प्रामाणिकता हो, तभी सेवाकार्य सफल होते हैं। सच्ची सेवा अपनेपन के भाव से ही पैदा होती है और इसी अपनेपन के कारण समाज में आज भी अच्छाई कायम है। समाज को भी ऐसे सेवा कार्यों में यथासंभव सहभागी होना चाहिए। निःस्वार्थ बुद्धि से अपनेपन की भावना से की गई सेवा ही धर्म है।
इस अवसर पर मंच पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पुणे की महापौर मंजुषा नागपुरे, पंडित हृदयनाथ मंगेशकर, उषा मंगेशकर, आनंद भोसले और संस्था के चिकित्सा निदेशक डॉ. धनंजय केळकर उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरंभ में स्व. आशाताई भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सरसंघचालक जी ने कहा कि लता दीदी और आशाताई की संवेदना से उपजे स्वरों का सामर्थ्य अलौकिक है और उनका संगीत कभी भी खंडित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य इन दोनों का समावेश जीवनावश्यक जरूरतों में करना आवश्यक है। हर एक को सुलभ व किफायती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए। शासन व प्रशासन उनकी ओर से प्रयास कर ही रहे हैं। लेकिन ‘यह देश मेरा है’, इस भाव से हमें भी इसमें अपना योगदान देना चाहिए। सेवा भाव में स्थित अपनापन और अच्छाई ही सच्चा धर्म है।
व्यावसायिकता के दौर में भी मंगेशकर परिवार में सेवा भाव – देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगेशकर परिवार की देशभक्ति का गौरव करते हुए कहा, “मंगेशकर परिवार केवल संगीत के लिए नहीं, बल्कि प्रखर देशभक्ति के लिए भी जाना जाता है। विशेष रूप से वीर सावरकर जी के साथ परिवार का गहरा नाता रहा है। दीनानाथ मंगेशकर रूग्णालय ने कभी भी सेवा का सौदा नहीं किया, बल्कि सेवा भाव रखते हुए हजारों मरीजों का उपचार किया। आज के समय में ‘अफोर्डेबल केयर’ एक बड़ी आवश्यकता है। कई बार धर्मादाय संस्था भी आर्थिक संकट के चलते व्यावसायिकता की ओर मुड़ती है। लेकिन पंडित दीनानाथ मंगेशकर रुग्णालय ने केवल सेवा का ही उद्देश्य सामने रखा है। इसी विरासत का अब ‘लता-आशा’ मंगेशकर रुग्णालय के जरिये विस्तार हो रहा है। इस परिसर की ओर आने वाला रास्ता चौड़ा करने और पानी की कमी दूर करने हेतु सरकार हर तरह से सहयोग देगी। साथ ही धर्मादाय संस्थाओं को रियायत देने का भी प्रयास करेगी।
गीतों से परे जाकर राष्ट्रभक्ति – एकनाथ शिंदे
उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आशा भोसले के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि, आशाताई ने काफी संघर्ष करके जीवन के ‘आनंद का गीत’ गाया। संगीत का विश्व लता दीदी व आशाताई के सुरों के बिना अधूरा है। इस नए रुग्णालय के माध्यम से हजारों परिवारों को स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। मंगेशकर परिवार ने गीतों से परे जाकर राष्ट्रभक्ति का जतन किया है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रुग्णालय के चिकित्सा निदेशक डॉ. धनंजय केलकर ने रखी। उन्होंने कहा, “लता दीदी और आशाताई संगीत की आकाशगंगा के दो अटल सितारे है। जब तक संगीत है, तब तक उनकी स्मृति चिरंतन रहेगी। इस प्रस्तावित रुग्णालय में आठ मुख्य विभाग होंगे। पहले चरण में सर्जिकल और मेडिकल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाया जाएगा। साथ ही, महर्षि कर्वे स्त्री शिक्षा संस्था की ओर से मेडिकल कॉलेज का भी निर्माण किया जाएगा।“ कार्यक्रम का सूत्र संचालन अनिरुद्ध देडके ने किया।

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