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क्या है ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ?

क्या है ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ?

डॉ प्रवीण गुनानी आ सिंधु-सिंधु पर्यन्ता, यस्य भारत भूमिका.पितृभू-पुण्यभू भुश्चेव सा वै हिंदू रीति स्मृता. इस श्लोक के अनुसार “भारत के वह सभी लोग हिंदू हैं जो इस देश को पितृभूमि-पुण्यभूमि मानते हैं”वीर दामोदर सावरकर के इस दर्शन को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मूलाधार बनाकर संघ का संगठन, संस्थापना करने वाले डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी…

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संघ को समझना है तो शाखा आइए

संघ को समझना है तो शाखा आइए

राजीव तुली विभिन्न कारणों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा में रखना मित्रों तथा अमित्रों दोनों के लिए लाभप्रद रहता है। अमित्र लिखा है, शत्रु नहीं, क्योंकि संघ किसी को भी अपना शत्रु नहीं मानता है। समाज दो भागों में है—एक जो आज स्वयंसेवक हैं और दूसरे जो भविष्य में संघ से जुड़ेंगे, ऐसी संघ…

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विवेकानन्द केन्द्र के अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्ण जी को विनम्र श्रद्धांजलि

विवेकानन्द केन्द्र के अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्ण जी कर्मयोग की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन स्वामी विवेकानन्द जी के विश्वबंधुत्व एवं सहिष्णुता के संदेश के प्रसार तथा राष्ट्र एवं समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। बालकृष्ण जी का सरल जीवन, निःस्वार्थ सेवा, त्याग एवं हिन्दुत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा भारतवासियों के…

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लोकेषणा की कामना नहीं

लोकेषणा की कामना नहीं

पुणे से जब नागपुर लीटकर आए, तब मैं संघ स्वयंसेवकों की ओर से उनका स्वागत करने के लिए स्टेशन पर गया। थोडी देर में गाड़ी आई डॉक्टर जी डिब्बे के दरवाजे पर ही खडे थे। गाडी रुकते ही साथ लाई श्रद्धासिक्त पुष्पमाला उन्हें अर्पण करने के लिए मैंने ज्यों ही हाँथ बढ़ाए त्यों ही उन्होंने…

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डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें…

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भाऊराव देवरस: सजीव अस्तित्वरूप

भाऊराव देवरस: सजीव अस्तित्वरूप

भाऊराव देवरस लखनऊ आए थे। पुराने कुछ सहयोगी उनसे बात कर रहे थे। अचानक वे बोल पड़े, ‘सुनो! डॉ. हेडगेवार की पीढ़ी के लोग एक-एक कर चले गए। दो-चार बचे हैं। मेरा नंबर तो पहले है।’ यह बात है, 9 मार्च, 1992 की। कुछ दिनों बाद ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली नगला चंद्रभान में…

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सहज सकोची

सहज सकोची

जहाँ तक स्मरण आता है, मैंने पहले-पहल श्री गुरुजी को सन  1936 में पटना स्टेशन पर देखा था। गया में संघ शाखा प्रारम्भ हो चुकी थी। उन दिनों संघ में कार्यकर्ताओं को डॉक्टर हेडगेवार जी के बाद में जिन तीन व्यक्तियों का नाम बताया जाता था, उनमें श्री गुरुजी बाबासाहव आप्टे तथा दादाराव परमार्थ थे।…

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रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ का स्मरण भी कुछ ऐसा ही है। उनके बारे में सोचते ही मन में किसी बड़े पद की नहीं, एक…

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दिल्ली का गुप्त अभियान से जुड़ा विभाजन काल का ऐतिहासिक संस्मरण

विभाजन से पहले दिल्ली में संघ का गुप्त अभियान: दुर्लभ संस्मरण

प्रस्तावना: दिल्ली का गुप्त अभियान दिल्ली का गुप्त अभियान भारत विभाजन से पहले की पुरानी दिल्ली से जुड़ा एक चर्चित संस्मरण है। उस समय राजधानी के अनेक क्षेत्रों में सांप्रदायिक तनाव का वातावरण था और सामान्य नागरिकों का जीवन भी इससे प्रभावित हो रहा था। विशेष रूप से जामा मस्जिद, दरीबा कलां और आसपास के…

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