जनसहयोग से पुनर्जीवित हुई नून नदी, जालौन बना जल संरक्षण का मॉडल
बुन्देलखण्ड के सूखाग्रस्त जालौन जिले में विलुप्त होती नून नदी को जनसहयोग से नया जीवन देने की मिसाल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिना सरकारी बजट और आर्थिक सहायता के जिले के प्रशासन, सामाजिक संगठनों, किसानों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से नून नदी फिर से बहने लगी है। इस नवाचार के लिए जालौन को देश में जल संरक्षण कार्यों के लिये तीसरा स्थान मिला और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नवम्बर 2025 में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय को राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया।
47 गाँवों की जीवनरेखा बनी नदी
नून नदी का उद्गम महेवा ब्लॉक के सतोह गाँव से होता है। करीब 82 किलोमीटर लम्बी यह नदी 47 ग्राम पंचायतों की लगभग 2780 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती हुई शेखपुर गुढ़ा गाँव के पास यमुना नदी में मिलती है। वर्ष 2014 की भीषण बाढ़ के बाद नदी में भारी कटान हुआ और धीरे-धीरे इसका स्वरूप बिगड़ने लगा। समय के साथ नदी सूखने लगी और अस्तित्व संकट में पहुँच गयी।
डीएम की पहल से शुरू हुआ पुनरोद्धार अभियान
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने वर्ष 2024 में नदी पुनर्जीवन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की। इसके बाद 13 अप्रैल 2025 को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने सतोह गाँव में फावड़ा चलाकर अभियान का शुभारम्भ किया। जल सहेलियों, समर्थ फाउण्डेशन, सामाजिक संगठनों, किसानों और स्थानीय नागरिकों ने अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभायी। करीब डेढ़ माह तक चले कार्य में 2000 से अधिक लोग शामिल रहे। लगातार श्रमदान और मशीनों की मदद से नदी की खोदाई हुई और जलधारा फिर बह निकली।
जल संरक्षण का बना जन आन्दोलन
नदी पुनर्जीवन के बाद 23 जुलाई 2025 को जिले में जल संरक्षण जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलेभर में एक ही दिन 1850 जल पाठशालाएँ संचालित की गयीं और करीब साढ़े सात लाख लोगों ने जल संरक्षण की शपथ ली। ग्राम पंचायतों में वाटर बजटिंग प्रणाली लागू की गयी। साथ ही लगभग 400 तालाब और 300 छोटे-बड़े चेकडैम भी बनाये गये।
पहले भी हुई थी पहल
वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी चाँदनी सिंह ने नून नदी की धारा को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू किया था। नलकूपों की सहायता से नदी में पानी छोड़ा गया था, जिसकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहना की थी। उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने इसे जन आन्दोलन का रूप देकर सफलता हासिल की। जिले में खेतों की मेड़बन्दी, वाटर हार्वेस्टिंग और गोशालाओं में सीसीटीवी निगरानी जैसी पहल भी की गईं। कलेक्ट्रेट परिसर में पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देने के लिये पार्क विकसित किया गया और प्राचीन कुएं का पुनरोद्धार कराया गया। प्रशासन की यह पहल अब बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए जल संरक्षण का प्रेरणादायी मॉडल बन चुकी है।

