मनोज गर्ग
Conversion In India : छोटी बीमारी से लेकर कैंसर तक, डिप्रेशन से लेकर भूत भगाने तक, नौकरी दिलाने, बांझपन दूर करने, मनपसंद साथी का चयन या फिर विदेश जाने का वीजा ये सब आपको मिलेगा। शर्त केवल एक ही है, आप यीशु को पूरी तरह से अपना लें। यही सब हो रहा है अब पंजाब में। आज पंजाब के अधिकतर जिलों में चर्च ‘यीशु दा मंदिर’ और प्रसाद ‘मसीह दा लंगर’ के रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय हो चले हैं। ईसाई मिशनरियां भ्रम, चमत्कार और अन्धविश्वास फैलाकर गरीब, अशिक्षित और जरूरतमंदों की मजबूरी का लाभ उठाकर लगातार धर्मांतरण में लगी हैं।
पिछले दो दशकों में पंजाब का शायद ही कोई ऐसा जिला बचा हो जहां होम चर्च (घरों में बने चर्च) और मिनिस्ट्रीज (छोटे-छोटे चर्च जो घरों से संचालित हैं, जब सफल हो जाते हैं तो उसे मिशनरी अपनी भाषा में मिनिस्ट्रीज कहते हैं) की संख्या तेजी से न बढ़ी हो। हालात ये है कि कई बड़े शहरों के हर मोहल्ले में एकाध होम चर्च और कोई न कोई मिनिस्ट्री अवश्य मिलेगी। धर्मान्तरण का यह कुचक्र खासकर पंजाब के उन क्षेत्रों में चलाया जा रहा है जो पाकिस्तान बॉर्डर से जुड़े हुए हैं। अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, होशियारपुर, कपूरथला, गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर, पठानकोट और तरन तारन जैसे शहर इसकी विशेष चपेट में हैं। इन जिलों में होम चर्च की संख्या पिछले 5 वर्षों में तीन सौ प्रतिशत बढ़ी है।

पंजाब में मतांतरण करके ईसाई बनाने वालों की संख्या शहरों की तुलना में गांवों में अधिक है। गांव में रहने वाले दलित समुदाय के लिए ईसाई पादरी प्रभु यीशु के चमत्कार और दु:खों से निवारण के दरबार लगाते हैं और बीमारियों का मुफ्त इलाज, स्कूलों में एडमिशन जैसे अन्य लालच देते हैं।
पंजाब में दलित और वाल्मीकि समाज के धर्मांतरण का प्रमुख कारण उन्हें अपने बराबर न मानना भी है इसलिए भी मजहबी और वाल्मीकि बंधुओं का ईसाई धर्म की तरफ झुकाव बढ़ रहा है। दूसरा, पंजाब में मतांतरण करके ईसाई बनाने वालों की संख्या शहरों की तुलना में गांवों में अधिक है। गांव में रहने वाले दलित समुदाय के लिए ईसाई पादरी प्रभु यीशु के चमत्कार और दु:खों से निवारण के दरबार लगाते हैं और बीमारियों का मुफ्त इलाज, स्कूलों में एडमिशन जैसे अन्य लालच देते हैं। प्रार्थना सभा के माध्यम से चर्च लाने के बाद लोगों से अपनी समस्याएं लिखकर एक बॉक्स में डलवाते हैं। इस क्षेत्र में समस्याएं ज्यादा होती हैं, उन गांवों को पास्टर (पादरी) द्वारा गोद लेने के बाद आर्थिक मदद के नाम पर वह अपना काम शुरु करते हैं।
षड्यंत्र दो दशकों से अधिक का
वर्ष 2000 में तमिल ईसाई प्रचारक डॉ. पॉल दिनाकरण के पंजाब आने के बाद धर्मांतरण में तेजी आई। उस समय पंजाब जातिवात, अलगावाद, नशे आदि की चपेट में था। ऐसी स्थिति मतांतरण के लिए अनकूल थी। दिनाकरण ने लोगों को विविध प्रकार के प्रलोभन दिये। लोग झांसे में आते गए और उनका उद्धेश्य पूरा होता गया। इसके बाद अंकुर नरुला, बजिंदर सिंह, कंचन मित्तल, गुरनाम सिंह खेड़ा, हरजीत सिंह, सुखपाल राणा, फारिस मसीह, अमृत सिंधु जैसे कई बड़े नाम हैं जिन्होंने मतांतरण को गति दी। अंकुर नरूला पंजाब में इस समय सबसे तेजी से बढ़ रहे मिनिस्ट्रीज के पास्टर (पादरी, ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करने वाला) हैं। देश दुनिया में उनके अकेले के 15 चर्च हैं। ऐसा भी बताया जाता है कि बड़ी संख्या में सिखों का उन्होंने कन्वर्जन किया है। ये भी कहा जा रहा है कि जालंधर में एशिया का सबसे बड़ा चर्च वे ही बनवा रहे हैं, जिसकी लागत कई करोड़ों में बताई जा रही है।
बदली डेमोग्राफी
14 साल पहले हुई जनगणना में सिख आबादी लगभग 57 फीसदी थी, हिंदू 38.5 प्रतिशत, वहीं क्रिश्चियन समुदाय डेढ़ फीसदी से भी कम था। एक अनुमान के अनुसार अब ईसाई रिलीजन को मानने वाले 15 फीसदी से ऊपर जा चुके हैं। वर्ष 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के 12 हजार गांवों में से 8 हजार गांवों में मिशनरी संस्थाएं काम कर रही हैं। अकेले गुरदासपुर में 600-700 घर चर्च में बदल चुके हैं जिसका परिणाम यह है कि आज पंजाब में बड़े स्तर पर जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) परिवर्तन दिखाई दे रहा है। यह ठीक वैसे ही हो रहा है जैसे 90 के दशक में केरल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु में हुआ था।
आवरण नहीं बदला
खास बात यह है कि इन मिशनरियों ने न तो अपना नाम बदला, न अपना वेश, न अपना रहन-सहन। सिख डेरों की देखा-देखी चंगाई सभा प्रारंभ की। यहां पास्टर को पापा जी कहा जाता है। जो पगड़ी वाला ही होता है। लकड़ी की बैंचों की जगह दरियां बिछी होती है, क्रिसमस पर शोभायात्रा निकाली जाती है। प्रेयर (प्रार्थना) को अरदास कहा जाता है। यही वो तरीके हैं जिससे किसी को यह आभास ही नहीं होता कि कन्वर्जन किया जा रहा है। कुल मिलाकर आज के चर्च में वो सब तामझाम है जो पंजाब की आबादी को अपनी ओर खींच रहा हैं। मिनिस्ट्रीज व होमचर्च के कारण बढ़ता ईसाईकरण चिंताजनक है। सवाल उठता है कि इन चर्चों को धर्मांतरण के लिए इतना धन कहाँ से मिलता है? धर्मांतरण एक ऐसा जहर है जो हमारे देश को, हमारी सनातन संस्कृति को दीमक की तरह खोखला कर रहा है। विस्फोटक होती स्थिति के लिए सरकार, समाज और सामाजिक संगठनों की सक्रियता ही हल निकाल पाएगी।
पादरी बजिंदर को यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म में हुई उम्र कैद
पंजाब के पॉक्सो न्यायालय ने बीती 2 अप्रैल को पादरी बजिंदर सिंह को यौन उत्पीडऩ और दुष्कर्म के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह पादरी बजिंतदर सिंह पंजाब के ताजपुर (जालंधर) और माजरा (साहिबजादा अजीत सिंह नगर) में चर्च चलाता है तथा चमत्कारी रूप से बीमारियां और अन्य समस्याएं ठीक करने का ढोंग कर हिंदू-सिखों को ईसाई बनाने के काम में लगा हुआ था।