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धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है; हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है भोपाल। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती…

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अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज‘ दिनांक – 21 दिसंबर, 2025, प्रथम सत्र संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु –

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संघ किसी को विरोधी नहीं मानता, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाला संगठन है – दत्तात्रेय होसबाले जी

संघ किसी को विरोधी नहीं मानता, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाला संगठन है – दत्तात्रेय होसबाले जी

गोरखपुर, 17 दिसंबर 2025। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी “संघ की 100 वर्ष की यात्रा एवं भविष्य की दिशा” में मुख्य वक्ता सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि घटनाओं की संख्या अधिक होने पर किसी एक घटना का महत्व कम नहीं हो जाता। यदि परिवार…

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उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारे पूर्वज और मूल एक ही हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारे पूर्वज और मूल एक ही हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

संतकबीरनगर। हिन्दू समाज की एकता, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंगलवार को जनपद में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी रहे। उन्होंने सामाजिक एकता, राष्ट्रहित और संगठनात्मक चेतना पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता संत कबीर मठ…

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Only an organized society can lead a nation to ultimate glory – Dattatreya Hosabale

संगठित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव पर ले जा सकता है – दत्तात्रेय होसबाले जी

जोधपुर, 14 दिसंबर 2025। संघ शताब्दी वर्ष (संघ@शताब्दी) के उपलक्ष्य में जोधपुर महानगर के भाग क्रमांक-2 में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि करवट ले रहे भारत में समाज के मन और इच्छाशक्ति का महत्वपूर्ण स्थान है। संस्कार से संगठन का संघ-कार्य ही…

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The Sangh emphasizes the promotion of self-respect, unity, and national consciousness in society – Sunil Ambekar ji

संघ समाज में स्वाभिमान, एकता व राष्ट्रीय चेतना के प्रसार पर बल देता है – सुनील आंबेकर जी

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से की थी और बीते 100 वर्षों में संघ ने इसी विचार के साथ निरंतर कार्य किया है। शाखाओं के माध्यम से अनुशासन, देशभक्ति और…

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Respecting diversity is a characteristic of Hindu religion and culture – Dr. Krishna Gopal Ji

विविधता का सम्मान करना हिन्दू धर्म और संस्कृति की विशेषता – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

असहिष्णुता से दुनिया में फैली अराजकता, इसका समाधान सिर्फ हिन्दू दर्शन में – डॉ. कृष्ण गोपाल जी बरेली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति और हिन्दू धर्म अनंत विविधता को एक साथ लेकर चलने का सामर्थ्य रखता है। आध्यात्म हिन्दू धर्म और संस्कृति की सबसे बड़ी…

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राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

पुणे, 01 दिसंबर, 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कोथरूड के यशवंतराव चव्हाण थिएटर में आदित्य प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित कृतज्ञता समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि विश्व कल्याण की पताका फहराते हुए श्रीराम मंदिर बन गया है। अब पहले से भी अधिक भव्य, शक्तिशाली और…

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“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

इंदौर, 30 नवम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि पुराणों और दुनिया के विभिन्न विद्वानों ने हिन्दू और हिन्दुस्तान को अलग-अलग कालखंडों में परिभाषित किया। भारत, मानव धर्म का देश है, जो सृष्टि में एकत्व का दर्शन करता है, इसकी सृष्टि के प्रति कृतज्ञता की दृष्टि है। यहाँ पुरुषार्थ के…

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श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया

डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य है कि हम आज जैसी संकटपूर्ण परिस्थिति में पैदा हुए हैं। संसार में उसी का नाम अमर होता है जो संकटकाल में कुछ कर दिखाता है। एक वर्ष के…

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