ताड़मेटला नरसंहार – माओवादी आतंक की क्रूरता; इतिहास नहीं भूलेगा वीरों का बलिदान
06 अप्रैल, 2010 का दिन एक गहरे जख्म की तरह अंकित है। सुकमा जिले के घने जंगलों में ताड़मेटला के पास नक्सलियों ने ऐसा खूनी खेल खेला, जिसने पूरे देश…
विश्व संवाद केन्द्र अवध, लखनऊ
संवादादात् सौहार्दम्
06 अप्रैल, 2010 का दिन एक गहरे जख्म की तरह अंकित है। सुकमा जिले के घने जंगलों में ताड़मेटला के पास नक्सलियों ने ऐसा खूनी खेल खेला, जिसने पूरे देश…
समाज और राष्ट्र को तोड़ने के लिए विश्वविद्यालयों (शिक्षा के मंदिरों) का उपयोग न हो 1983 में तो हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि पूरे एक वर्ष के लिए…