साढ़े तीन की चाय पर चर्चा…
चाय के बारे में बात करें तो परमपूजनीय डॉ. हेडगेवार तो चाय को ‘संघ का अधिकृत पेय’ कहते थे। महाल स्थित डॉ. हेडगेवार भवन के रसोईघर में दोपहर साढ़े तीन बजे चाय की घंटी बजती है। उस समय कार्यालय परिसर में उपस्थित सभी जन, अतिथि, आगंतुक, निवासी प्रचारक चाय पीने के लिए एकत्रित हो जाते हैं। परमपूजनीय सरसंघचालक जी अगर कार्यालय में उपस्थित होते है, तो वे भी समूह के साथ बैठकर चाय पीते हैं। मूलतः यह ‘साढ़े तीन की चाय’ अपने राष्ट्रीय चिंतन ‘शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है’ का कृतिरुप दर्शन है।
संघ क्या है? इसका उत्तर है आत्मीयता का भाव… और इसी परिकल्पना को साकार करती है यह ‘साढ़े तीन की चाय’ की कालावधि! इस अनौपचारिक एकत्रीकरण में बड़े-बड़े राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, सामान्य स्वयंसेवक… यहां तक कि कार्यकर्ताओंके संगी-साथी तथा वाहनचालक आदि सभी बेरोकटोक साढ़े तीन बजे की चाय का स्वाद लेते हैं। अन्य स्थानों पर जैसे लोगों के बड़े-छोटे पद के हिसाब से खानपान आदि की अलग-अलग व्यवस्था होती है, वैसा आपको संघ कार्यालय में कभी दिखाई नहीं देगा। यह परंपरा पूजनीय श्रीगुरुजी से आज तक चली आ रही है। चाय तो निमित्त मात्र है, चाय की चुस्की लेते हुए समसामयिक घटनाओं पर मंथन, परिवार का हाल-चाल पूछना, हास्य-विनोद आदि सहजभाव से चलता है।
पूजनीय श्रीगुरुजी एवं पूजनीय बालासाहब जी के साथ साढ़े तीन की चाय का स्वाद लेने वाले ऐसे अनेक कार्यकर्ता आज भी हमारे बीच में हं, जो उनके कालखंड के अनेक स्मरण सुना सकते हैं। पूजनीय श्रीगुरुजी उबलती हुई गरमागरम चाय पीना पसंद करते थे। उस दौर में उनके साथ चाय में शामिल बड़े राजनीतिक नेताओं, संघ के अधिकारियों, प्रांतों से आए प्रचारकों आदि से लेकर बाल स्वयंसेवकों तक से उनका सीधा संवाद होता था। व्रतबंध या विवाह का निमंत्रण देने आए परिवार को चाय के साथ-साथ उस धार्मिक विधि का महत्व कम समय में समझाना, यह तो परमपूजनीय श्रीगुरुजी की वाणी ही कर सकती थी।
चाय पर चर्चा का यह क्रम आगे पूजनीय बालासाहब देवरस, पूजनीय रज्जूभैया, पूजनीय सुदर्शनजी से होता हुआ आज भी श्री मोहनराव भागवत के साथ जारी है। पूजनीय सुदर्शनजी के काल में तो अन्य मतों के विद्वानों ने भी इस चाय का स्वाद लिया था। नागपुर समेत देश भर से आने वाले संघ के हजारों स्वयंसेवकों ने अपने परिवारजन के साथ न केवल इस चाय का अपितु चाय के साथ चलने वाले सहजानंद का भी प्राशन किया है।
