असम – बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वच्छता एवं पुनर्वास अभियान में जुटे भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता
असम – बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वच्छता एवं पुनर्वास अभियान में जुटे भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता

असम – बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वच्छता एवं पुनर्वास अभियान में जुटे भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता

गुवाहाटी। शिवसागर एवं चराइदेव ज़िलों में आई भीषण बाढ़ ने जन-धन, कृषि एवं पशुधन को क्षति पहुँचाई है। इस आपदा से 622 गाँवों के लगभग 3.32 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें चराइदेव ज़िला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ 1.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए, जबकि उसके बाद शिवसागर का स्थान है। बाढ़ के कारण लगभग 45,342 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई तथा 32,477 लोग विस्थापित होकर 81 सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हुए। इसके अतिरिक्त 74,000 से अधिक पशुधन की मृत्यु भी हुई है। ऐसी विषम परिस्थिति में भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता बाढ़ पीड़ितों की सहायता, राहत एवं पुनर्वास कार्यों में निरंतर जुटे हैं।

भारतीय किसान संघ के लखीमपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, धेमाजी, मोरीगांव, नलबाड़ी तथा कामरूप ज़िलों के कार्यकर्ताओं ने राहत सामग्री के वितरण के साथ-साथ 500 बीघा भूमि में रोपाई हेतु धान की पौध (पैडी सैपलिंग) की व्यवस्था की है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए 5,000 से अधिक विद्यार्थियों के लिए विद्यालयी वर्दी (स्कूल यूनिफॉर्म) उपलब्ध कराई जा रही है। भारतीय किसान संघ से जुड़े तीन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीसी) ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान हेतु ₹3 लाख की राशि एकत्रित की है।

जोरहाट ज़िला इकाई ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पारंपरिक हर्बल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का आयोजन किया। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों एवं घरेलू उपचारों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मोरीगांव ज़िले से 50 कार्यकर्ताओं की एक टीम पिछले चार दिनों से शिवसागर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण के साथ-साथ पीड़ित परिवारों के घरों के पुनर्निर्माण, स्वच्छता अभियान तथा अन्य पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से लगी है। पशुओं के लिए पशु चारे की व्यवस्था भी की जा रही है।

बारपेटा एवं बोंगाईगांव ज़िलों की इकाइयाँ बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास हेतु मशरूम उत्पादन, पशुपालन तथा अन्य आजीविका आधारित स्वरोज़गार योजनाओं पर कार्य कर रही हैं। जलस्तर कम होते ही कार्यकर्ता योजनाओं को धरातल पर लागू करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय होंगे।

भारतीय किसान संघ का लक्ष्य विभिन्न राहत, पुनर्वास एवं आजीविका संवर्धन कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 5,000 बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पहुँचना तथा उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग प्रदान करना है।

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