“अलख निरंजन” का उद्घोष करने वाले और योग विद्या को जन-जन तक पहुँचाने वाले महान सिद्ध योगी, गुरु मत्स्येंद्रनाथ की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
प्रमुख जीवन दर्शन और योगदान-
योग विद्या के पुनरुद्धारकर्ता:
मत्स्येंद्रनाथ जी को हठयोग और तंत्र विद्या का महान ज्ञाता माना जाता है। उन्होंने जटिल यौगिक क्रियाओं को सरल बनाया ताकि एक साधारण मनुष्य भी आध्यात्मिक उन्नति कर सके।
गुरु-शिष्य परंपरा:
वे सुप्रसिद्ध ‘योगी बाबा गोरखनाथ’ के गुरु थे। गुरु-शिष्य की यह जोड़ी भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।
सामाजिक समरसता:
उन्होंने जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर भक्ति और योग का मार्ग प्रशस्त किया। उनके अनुयायी हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में पाए जाते हैं