अयोध्या में ‘श्रीराम पर्व’ जारी, योग शिविर भी:सांस्कृतिक-सामाजिक उत्थान के लिए 16 स्थानों पर हो रहे कार्यक्रम…
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ अयोध्या परिक्षेत्र में ‘श्रीराम पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के तहत दर्शननगर स्थित सूर्यकुण्ड में सात दिवसीय योग शिविर चल रहा है। योग भारती के संस्थापक श्री श्रीनिवास मूर्ति के निर्देशन में यह शिविर सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जिसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राजपाल संयोजन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इसमें योग की बारीकियां सीख रहे हैं।
‘श्रीराम पर्व’ के सूत्रधार इंजीनियर रवितिवारी ने इस आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष प्रतिपदा से शुरू हुआ यह अभियान अयोध्या के सर्वांगीण सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस वृहद आयोजन को अयोध्या के महापौर महंत श्री गिरीशपति त्रिपाठी का विशेष संरक्षण प्राप्त है। अभियान के अंतर्गत पं. ज्वाला प्रसाद संगीत शोध संस्थान द्वारा अयोध्या की समृद्ध संगीत परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत 16 चिन्हित स्थानों पर सामूहिक हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और भारत माता की भव्य आरती सहित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से राम राज्य की संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से नागरिक कर्तव्यों पर संवाद और महत्वपूर्ण संगोष्ठियों द्वारा समाज को जागरूक किया जा रहा है।
अयोध्या की इस पावन धरा पर चल रहे इस सांस्कृतिक यज्ञ में वशिष्ठ फाउंडेशन, श्री अयोध्या फाउंडेशन, परमहंस नेचुरोपैथी क्लीनिक, एस्सेल गुरुकुल ट्रस्ट और रघुवर दयाल सेवा ट्रस्ट जैसे विभिन्न सामाजिक समूह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीनिवास शास्त्री, चंद्रशेखर तिवारी, प्रवीण सिंह, ब्रजमोहन तिवारी, राम कुमार गुप्ता, विपनेश पाण्डेय और विवेक पाण्डेय ‘रुद्राक्ष’ सहित अनेक प्रबुद्ध जन निरंतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
विभिन्न स्थानों पर चल रहे इन सभी कार्यक्रमों का विधिवत समापन और भव्य सम्मान समारोह 27 मार्च 2025 को अयोध्या के रानी हो कोरिया पार्क में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उन सभी विभूतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने इस पूरे आयोजन में अपना विशिष्ट सहयोग दिया है और अयोध्या की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने में अमूल्य योगदान दिया है।
