घर का एसी और मोबाइल बच्चों की आंखों के लिए खतरा? 2050 तक हर दूसरे बच्चे की कमजोर होगी नजर
बच्चों की आंखों की रोशनी आज के समय में तेजी से चिंता का विषय बनती जा रही है। मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और एयर कंडीशनर (एसी) का बढ़ता उपयोग आंखों पर गहरा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान जीवनशैली में बदलाव नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में आंखों से जुड़ी समस्याएं महामारी का रूप ले सकती हैं।
इंदौर के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने हाल ही में विभिन्न वैश्विक शोधों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक दुनिया का हर दूसरा बच्चा आंखों से जुड़ी किसी न किसी गंभीर समस्या का सामना कर सकता है। उनका मानना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम, घर के भीतर रहने की आदत और प्राकृतिक रोशनी में कम समय बिताना इसके प्रमुख कारण हैं।
2050 तक क्यों बढ़ सकती हैं आंखों की समस्याएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की दिनचर्या में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां बच्चे घंटों मैदान में खेलते थे, वहीं अब उनका अधिकांश समय मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन के सामने बीतता है।
इसी वजह से बच्चों की आंखों की रोशनी पर लगातार दबाव पड़ रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं, जिससे नजर कमजोर होने, सिरदर्द और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
मोबाइल और स्क्रीन टाइम सबसे बड़ा कारण
डॉ. ओ.पी. अग्रवाल के अनुसार बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत आंखों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और लंबे समय तक एक ही दूरी पर देखने की आदत आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इसके साथ ही बाहर खुले वातावरण में खेलने का समय कम होने से आंखों का प्राकृतिक विकास भी प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उन्हें प्रतिदिन कुछ समय खुले वातावरण में खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
क्या एसी भी बढ़ा रहा है आंखों की परेशानी?
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आधुनिक घरों और कार्यालयों में लगातार एयर कंडीशनर (एसी) चलने से ड्राई आई (Dry Eye) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
एसी कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे आंखों की सतह जल्दी सूखने लगती है। इसके परिणामस्वरूप आंखों में जलन, खुजली, लालपन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
हालांकि, केवल एसी ही इसका कारण नहीं है। यदि लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान व्यक्ति कम पलक झपकाता है, तो यह समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
डायबिटीज भी बन रही है बड़ा खतरा
नेत्र विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि भविष्य में डायबिटीज आंखों की रोशनी छिनने का प्रमुख कारण बन सकती है।
मधुमेह के कारण आंखों की रेटिना की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समय पर जांच और उपचार न मिलने पर यह स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों ने क्या दी सलाह?
इस परिचर्चा में डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. पलक अग्रवाल और डॉ. रक्षित अग्रवाल ने भी आंखों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
विशेषज्ञों की प्रमुख सलाह—
- बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखें।
- प्रतिदिन कम से कम 1–2 घंटे प्राकृतिक रोशनी में बाहर समय बिताएं।
- लगातार स्क्रीन देखने के दौरान नियमित अंतराल पर आंखों को आराम दें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और आंखों में सूखापन महसूस होने पर नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।
- डायबिटीज के मरीज नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं।
बच्चों की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखना आज हर परिवार की जिम्मेदारी बन गया है। आधुनिक तकनीक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उसका अत्यधिक उपयोग आंखों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्क्रीन टाइम नियंत्रित किया जाए, बच्चों को खुले वातावरण में खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और नियमित नेत्र परीक्षण कराया जाए, तो भविष्य में होने वाली कई गंभीर आंखों की समस्याओं से बचा जा सकता है।