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क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

अगर, तगर, देवदारु, चन्दन, रक्त चन्दन, गूगुल, जायफल, लौंग, चिरायता, असगन्ध, यह दसों चीजें समान भाग में लेनी चाहिए। इसके साथ में विशेष रोग की विशेष औषधियाँ भी मिला लेनी चाहिए। तैयार औषधियों का दशवाँ भाग शर्करा और दशवाँ भाग घृत मिला लेना चाहिए। विशेष रोगों की विशेष हवन सामग्री- शीत ज्वर – (1) पटोल…

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धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत

उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य…

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करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज भारतीय सन्त परम्परा के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म, वेद-वेदान्त, भारतीय संस्कृति और धर्मशास्त्रों के अध्ययन तथा संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका संन्यास-नाम स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती था। कठोर तपस्या, अद्भुत शास्त्रज्ञान, वैराग्य और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे देशभर…

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गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके…

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देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

भारतीय हिंदू परंपरा में सदियों से ही ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की परंपरा रही है. लेकिन साधु-संतों के चमत्कारों और लीलाओं को समझना आसान नहीं है. सिद्ध योग क्रिया से साधु-संतों ने दिव्य शक्तियां पाई और अद्भुत चमत्कार दिखाए. सिद्ध योग क्रिया से कोई ठंड में निर्वस्त्र रहता है, कोई केवल टाट पहनकर रहता है, कोई…

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प्रत्येक समस्या को राजनीतिक दृष्टि से न देखें– श्री सुनील आंबेकर

प्रत्येक समस्या को राजनीतिक दृष्टि से न देखें– श्री सुनील आंबेकर

नई दिल्ली: इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के तत्वावधान में मंगलवार 16 जून 2026 स्पीकर हॉल, कांस्टीटयूशन क्लब में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एनडीटीवी के सीईओ एवं एडिटर इन चीफ श्री राहुल कंवल जी मुख्य अतिथि तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री…

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हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के लेखन पर कुछ काम करते हुए कवि भूषण के बारे में उनकी राय सामने आई। आचार्य शुक्ल ने कवि भूषण को ‘हिंदू जाति का प्रतिनिधि कवि’ कहा है। जाति से आचार्य शुक्ल का आशय किसी ‘कास्ट’ से नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्रीयता से है, क्योंकि हिंदू कोई जाति तो है नहीं। आचार्य…

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महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

कुछ वर्ष पूर्व संगोल बहुत चर्चा में रहा । इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फैलीं । अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बताया किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया…

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हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

यह स्थापना हिन्दी के प्रख्यात ललित निबन्धकार आचार्य कुबेरनाथ राय की भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और उनकी मौलिक चिन्तन-दृष्टि को प्रकट करती है। भारतीयता, सनातन धर्म, लोकजीवन और विश्वबन्धुत्व जैसे विषयों पर उन्होंने अपने निबन्धों के माध्यम से गम्भीर तथा ललित भाष्य प्रस्तुत किए। हिन्दी साहित्य की आधुनिक विधा ललित निबन्ध को समृद्ध…

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'स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है'

‘स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है’

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपालः पत्रकारिता का पेशा कोई आसान काम नहीं है। घर में, संबंधियों में और रिश्तों में आपेक्षाएं पूरी करते हुए कई बार लोग शिकायतों का अवसर छोड़ देते हैं। आप निरंतर उन लोगों के लिए काम करते हैं, जो आपके लिए प्रत्यक्ष नहीं हैं, लेकिन हैं बहुत ताकतवर। पत्रकार समाज के लिए काम…

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