अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में ‘प्रताप’ होने का अर्थ
जब स्वाधीनता ने स्वयं को मानवीय स्वरूप में प्रकट करना चाहा, जब समता और समन्वय ने ‘योद्धा’ के रूप में खुद को ढालने की आरजू की, जब ‘वीरता और वैराग्य’ ने संयुक्त रूप से प्रस्फुटित होने का संकल्प लिया तब 09 मई 1540 को कुंभलगढ़ के किले में महाराणा प्रताप नामक आलोक का उदय हुआ।…