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विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे भारतीय परंपरा में विजयादशमी का पर्व केवल राम की रावण पर विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह सत्य पर असत्य की, धर्म पर अधर्म की और संगठन पर बिखरी हुई शक्ति की विजय का प्रतीक है। श्रीगुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) इस पर्व को संघ के लिए विशेष महत्त्व का मानते…

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पितृपक्ष का पालन किसे और क्यों करना चाहिए?

पितृपक्ष का पालन किसे और क्यों करना चाहिए?

पितृपक्ष को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसका पालन केवल हिन्दी भाषी हिन्दू ही करते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी हिन्दुओं के लिये यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय है। हिन्दी, तमिल, तेलुगु, गुजराती समेत विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं के लोग पितृपक्ष में अपने पितरों…

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धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत

उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य…

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‘Rise of Bharat means more united, more emancipated humanity’

Dr. Mohan Bhagwat, Sarsanghchalak, Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) at ‘Hindu Vishwa Bandhu: Embrace the World in Friendship’ All nations thrive, prosper and contribute to human progress is the dream of Hindus Toronto, Canada. RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji addressed a gathering at ‘Hindu Vishwa Bandhu – Embrace the World in Friendship’ event in Toronto,…

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भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

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महर्षि सिंगारु का त्याग

भगवान राम का तिल दान

लंकाधीश, असुरपति रावण को मारने के बाद भगवान राम लंका से अयोध्या वापिस लौटकर आए। महर्षि वसिष्ठ ने राम को सुझाव दिया कि वे किसी व्यक्ति को तिल का दान दें, क्योंकि उन्होंने रावण के साथ युद्ध में सैकडों व्यक्तियों को मारा था। तिल दान में लेने वाले व्यक्ति को चूंकि दान के परिणामों को…

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मैंने देखा इच्छामरण

मैंने देखा इच्छामरण

सबेरे का समय, चाय-पान का वक्‍त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे कुर्सी पर बैठे थे। चरण स्पर्श के लिए हाथ बढाए। सदैव की भाँति पॉव पीछे खींच लिए। मेरे साथ आए स्वयंसेवकों का परिचय हुआ। उनमें आदिलाबाद के एक डॉक्टर…

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महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

कुछ वर्ष पूर्व संगोल बहुत चर्चा में रहा । इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फैलीं । अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बताया किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया…

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हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

यह स्थापना हिन्दी के प्रख्यात ललित निबन्धकार आचार्य कुबेरनाथ राय की भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और उनकी मौलिक चिन्तन-दृष्टि को प्रकट करती है। भारतीयता, सनातन धर्म, लोकजीवन और विश्वबन्धुत्व जैसे विषयों पर उन्होंने अपने निबन्धों के माध्यम से गम्भीर तथा ललित भाष्य प्रस्तुत किए। हिन्दी साहित्य की आधुनिक विधा ललित निबन्ध को समृद्ध…

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आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

भारत की सांस्कृतिक चेतना में गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रकृति-सम्मान और नैतिक जीवन का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय संस्कृति में समय केवल गणना का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना का आयाम है। हिंदू धर्म में तिथियाँ मानव जीवन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने वाली आध्यात्मिक कड़ियाँ मानी गई हैं।…

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