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संघ-पथ का अविश्रांत पथिक

संघ-पथ का अविश्रांत पथिक

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी जिस महापुरुष की प्रेरणा और ज्ञान से हम कार्य करते हैं, उसने अपने हृदय पर सत्संस्कार करके अपने अन्दर के सारे अवगुणों का उन्मूलन कर सद्गुणों को प्रकट किया। संघ के जन्मदाता का यदि हम स्मरण करें तो हम भी अपने स्वभाव पर नियंत्रण ला उसमें परिवर्तन अवश्य कर सकते…

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गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके…

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लोकेषणा की कामना नहीं

लोकेषणा की कामना नहीं

पुणे से जब नागपुर लीटकर आए, तब मैं संघ स्वयंसेवकों की ओर से उनका स्वागत करने के लिए स्टेशन पर गया। थोडी देर में गाड़ी आई डॉक्टर जी डिब्बे के दरवाजे पर ही खडे थे। गाडी रुकते ही साथ लाई श्रद्धासिक्त पुष्पमाला उन्हें अर्पण करने के लिए मैंने ज्यों ही हाँथ बढ़ाए त्यों ही उन्होंने…

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डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें…

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'बस जीवित रहना, मरना नहीं': एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े चलाते थे। अखाड़ों में कुश्ती के साथ-साथ मलखम्ब, तलवार, गतका आदि का भी अभ्यास किया जाता था। पिताजी अपने होटल से ही पहलवानों को खूब…

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डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी

डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी

डॉ. हेडगेवार निवास पर आधारित विशेष आवरण, सूचना पुस्तिका का लोकार्पण नागपुर, 31 जुलाई 2026। भारतीय डाक विभाग, नागपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के ऐतिहासिक निवास “डॉ. हेडगेवार निवास, नागपुर” पर आधारित विशेष आवरण (Special Cover), सूचना पुस्तिका (Brochure) तथा स्थायी सचित्र डाक मुहर (Permanent Pictorial Cancellation) का लोकार्पण…

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मातृत्व सभ्यता की नींव है – डॉ. मोहन भागवत जी

मातृत्व सभ्यता की नींव है – डॉ. मोहन भागवत जी

भाग्यनगर, तेलंगाना। विश्वमंगल्या सभा ने 25-26 जुलाई को NI-MSME, यूसुफगुडा, हैदराबाद में दो दिन की प्रबोधन मीटिंग ऑर्गनाइज़ की। इस प्रोग्राम के तहत, रविवार को हैदराबाद के कोमाराम भीम आदिवासी भवन में विश्वमांगल्य सभा की देखरेख में “युगानुकुल मातृत्व” पर एक खास सेमिनार हुआ। हैदराबाद के सेवालाल बंजारा भवन में दो दिन की “दक्षिण भारत…

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डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

27 जुलाई भारत के लिए एक ऐसी तारीख है, जब पूरा देश मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को स्मरण करता है। एक तमिलभाषी, गीतापाठी, रामभक्त, वीणावादक अब्दुल कलाम साहब भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति (2002) थे। शिलांग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में छात्रों को व्याख्यान देते हुए उनका निधन हुआ था। ग्यारह वर्ष…

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सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी दिल्ली बैनर स्लाइडर शीर्ष क्षैतिज स्क्रॉल समाचा

सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी

“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा की प्रबोधन बैठक संपन्न नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि मातृत्व विषय पर मुझे बोलने के लिए कहना यह अपने आप में एक विरोधाभास है।…

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राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने सत्ता से अधिक सिद्धान्तों को महत्व दिया। वे स्वतंत्र भारत के उन विरले व्यक्तित्वों में थे जिन्होंने राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया। शिक्षाविद्, सांसद, केंद्रीय मंत्री और…

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