डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी
डॉ. हेडगेवार निवास पर आधारित विशेष आवरण, सूचना पुस्तिका का लोकार्पण नागपुर, 31 जुलाई 2026। भारतीय डाक विभाग, नागपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ....
मातृत्व सभ्यता की नींव है – डॉ. मोहन भागवत जी
भाग्यनगर, तेलंगाना। विश्वमंगल्या सभा ने 25-26 जुलाई को NI-MSME, यूसुफगुडा, हैदराबाद में दो दिन की प्रबोधन मीटिंग ऑर्गनाइज़ की। इस प्रोग्राम के तहत, रविवार को हैदराबाद...
डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा
27 जुलाई भारत के लिए एक ऐसी तारीख है, जब पूरा देश मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को स्मरण करता है। एक तमिलभाषी,...
सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी
“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा की प्रबोधन बैठक संपन्न नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन...
राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने सत्ता से अधिक सिद्धान्तों को महत्व दिया। वे...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य
श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा,...
शिक्षा वह है जो मनुष्य में उचित-अनुचित का विवेक जाग्रत करे – डॉ. मोहन भागवत जी
नागपुर, 1 जुलाई 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने जरीपटका स्थित सिन्धु एजुकेशन सोसायटी के अमृत महोत्सव वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम...
10, 11, 12 जुलाई को बेलगावी में होगी प्रांत प्रचारक बैठक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय़ प्रांत प्रचारक बैठक इस वर्ष युगाब्द 5128, विक्रम संवत् 2083, ज्येष्ठ (उत्तर भारत में आषाढ़) कृष्ण दशमी/एकादशी, द्वादशी एवं...
मैंने देखा इच्छामरण
सबेरे का समय, चाय-पान का वक्त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे...
जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता
प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से...
