Headlines

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे भारतीय परंपरा में विजयादशमी का पर्व केवल राम की रावण पर विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह सत्य पर असत्य की, धर्म पर अधर्म की और संगठन पर बिखरी हुई शक्ति की विजय का प्रतीक है। श्रीगुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) इस पर्व को संघ के लिए विशेष महत्त्व का मानते…

Read Full News
सदैव प्रेरित करने वाले विराट व्यक्तित्व

सदैव प्रेरित करने वाले विराट व्यक्तित्व

नरेन्द्र मोदी अशोक सिंहल जी ने हर थण इस महान राष्ट्र के उत्कर्ष का ही स्वप्न देखा था। हम उनके सपनों को साकार करने के संकल्प को फिर दोहराएं एक बहुत सुंदर सुभाषित है, ‘वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न *संचै नौर। परमारध के कारने, साधुन धरा शरीर।’ इसका मतलब है कि पेड़ कभी…

Read Full News
हैदराबाद की आजादी के लिए लड़ने वाला स्वयंसेवक, जिनसे CM ने मांगी थी सुरक्षा

हैदराबाद की आजादी के लिए लड़ने वाला स्वयंसेवक, जिनसे CM ने मांगी थी सुरक्षा

माधव राव ने कुछ स्वयंसेवकों को मुस्लिम पहचान देकर विभाजित पंजाब के शहरों में मुस्लिम लीग के प्रभाव वाले क्षेत्रों में तैनात कर दिया. ये लोग बताते थे कि कैसे पूरी तैयारी के साथ मुस्लिम लीग के लोग हिंदू बाहुल्य इलाकों की रिपोर्ट तैयार करते हैं, और फिर हमला करते थे. RSS के 100 सालों…

Read Full News
एकात्म मानवदर्शन केवल भारत नहीं, समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक – दत्तात्रेय होसबाले जी

एकात्म मानवदर्शन केवल भारत नहीं, समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक – दत्तात्रेय होसबाले जी

जयपुर, 25 सितंबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत को भारत बनाने की जीवन दृष्टि दी और इसे केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि विश्व के लिए मार्गदर्शन एवं मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन केवल भारतीय जनसंघ या…

Read Full News
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के एक महान विचारक, दार्शनिक और राजनेता थे, जिन्होंने दुनिया को एकात्म मानववाद का एक बेहद अनूठा और गहरा सिद्धांत दिया। उनके इस दर्शन में व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ईश्वर को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक ही श्रृंखला के अभिन्न हिस्से के रूप में देखा गया है। उनके इसी चिंतन…

Read Full News

धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत

उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य…

Read Full News
Shraddhanjali Sabha - RSS Sarsanghchalak Ji remembered A. Balakrishnan Ji as a Sampoorna Karyakarta

Shraddhanjali Sabha – RSS Sarsanghchalak Ji remembered A. Balakrishnan Ji as a Sampoorna Karyakarta

New Delhi. A Shraddhanjali Sabha in remembrance of A. Balakrishnan Ji, President of Vivekanand Kendra, honouring a life devoted to the service of Ma Bharati and for bringing education and social development to some of the most remote regions of Arunachal Pradesh, was held at Vivekananda International Foundation (VIF). RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji,…

Read Full News
11 सितम्बर 1893: जब शिकागो में गूंजा भारत का सनातन संदेश

11 सितम्बर 1893: जब शिकागो में गूंजा भारत का सनातन संदेश

शिकागो भाषण, 11 सितम्बर 1893   (Sankar, The Monk As the unknown life of Swami Vivekananda, Penguin Books)  ‘भारतवर्ष की विभूतियाँ’ नामक पुस्तक में शिकागों भाषण और स्वामी विवेकानन्द के विषय में लिखा है, “सन 1893 में आप शिकागो सर्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने के हेतु प्रतिनिधि होकर अमेरिका गये। अमेरिका और इंग्लैण्ड में करीब…

Read Full News
विनोबा भावे का राष्ट्र चिन्तन

विनोबा भावे का राष्ट्र चिन्तन

आचार्य विनोबा भावे भारतीय नवजागरण उन प्रमुख चिन्तकों में से हैं, जिनके विचारों में आध्यात्मिकता, नैतिकता, सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण का अद्भुत समन्वय दिखायी देता है। उनका राष्ट्र चिन्तन संकीर्ण राजनीतिक राष्ट्रवाद से आगे बढ़कर एक ऐसे मानवतावादी और समग्र राष्ट्र की कल्पना प्रस्तुत करता है, जो मनुष्य की बाह्य स्वतंत्रता के साथ-साथ उसकी आन्तरिक…

Read Full News
श्रीगुरुजी के ऐतिहासिक 'तीन पत्र'

श्रीगुरुजी के ऐतिहासिक ‘तीन पत्र’

डॉ. लोकेन्द्र सिंह जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ पत्र लिखने के अभ्यासी थे। पत्रों के माध्यम से श्रीगुरुजी का कार्यकर्ताओं के प्रति स्नेह, राष्ट्रप्रेम और हिन्दू समाज की एकात्मता के प्रति उनका संकल्प स्पष्ट झलकता है। उनके पत्रों में संघ कार्य के विस्तार, वैचारिक स्पष्टता, अनुशासन और व्यक्तिगत…

Read Full News