सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है – डॉ. मोहन भागवत जी
नागपुर, 2 अक्तूबर 2025। रेशीमबाग मैदान में आयोजित शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सम्पूर्ण...
श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया
डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य...
राजा हो कर देश की समस्याएं नहीं सुलझा सकता कोई: नाना जी देशमुख
दयानंद पांडेय नाना जी देशमुख अब नहीं है। पर मेरा मानना है कि अगर देश में दस-बीस नाना जी देशमुख भी हो जाएं तो देश की...
संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी
नागपुर, 28 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सुर, लय और ताल में समझौता हो सकता है, लेकिन संघगीत...
मधुभाई का जीवन कार्यकर्ताओं के लिए दीपस्तम्भ के समान – दत्तात्रेय होसबाले जी
संघ के ज्येष्ठ प्रचारक मधुभाई कुलकर्णी जी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा छत्रपति संभाजीनगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मधुभाई (माधव) विनायक कुलकर्णी जी की...
हमारे मन्दिर अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी
बाराबंकी के बरेठी में नारायण सेवा संस्थान के लक्ष्मी नारायण मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय...
भूतों के लिए चर्चित ‘मोहिते का वाड़ा’ और हाथीखाने तक में लगी संघ की पहली शाखा
लेखक: विष्णु शर्मा इस दशहरे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS अपने 100 साल पूरे कर रहा है. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक संघ के...
एक विराट संगठन का छठा महा अभियान
नरेन्द्र भदौरिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की यात्रा में कई घुमावदार अवरोधों को बड़े कौशल से पार किया है। इस यात्रा में पाँच बड़े...
जीवनज्योत संघ ज्योति में एकरूप करने वाले ‘मधु भाई’
रमेश पतंगे मधु भाई ने एक दीप की आराधना की, वह दीप यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। युवावस्था में आकर्षित करने वाली असंख्य विचारधाराएं थीं, परंतु मधु...
डॉ. हेडगेवार : ‘राष्ट्र की ‘आत्मा-चेतना’ के पुरोहित
बीसवीं शताब्दी का भारत केवल अंग्रेजी पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा न था, वह सांस्कृतिक विस्मृति और सामाजिक विखंडन की वेदना से भी व्याकुल था। अंग्रेजी...
