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अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज‘ दिनांक – 21 दिसंबर, 2025, प्रथम सत्र संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु –

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The Sangh works for the creation of a healthy society and a strong nation.

संघ स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण हेतु कार्य करता है

प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन का आयोजन अंडमान एवं निकोबार, 14 दिसंबर 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अंडमान एवं निकोबार विभाग द्वारा 14 दिसंबर 2025 को डी.बी.आर.ए.आई.टी. ऑडिटोरियम में “प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन…

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The Constitution embodies the spirit of taking everyone along – Dr. Mohan Bhagwat ji

संविधान में सभी को साथ लेकर चलने की भावना निहित है – डॉ. मोहन भागवत जी

पट्टी कल्याण, समालखा। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा 05 से 07 दिसंबर 2025 तक माधव सेवा न्यास, पट्टी कल्याण, समालखा (पानीपत) में ‘भारतीय इतिहास, संस्कृति और संविधान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। सरसंघचालक जी भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा ‘जम्मू-काश्मीर-लद्दाख’ पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया। उद्घाटन…

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निष्ठावान सच्चरित्र बनें और राष्ट्रभक्ति करें

निष्ठावान सच्चरित्र बनें और राष्ट्रभक्ति करें

मद्रास में विद्यार्थियों का कार्यक्रम था। श्री गुरुजी शिक्षा के विषय में बोल रहे थे। ‘शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना इतना ही नहीं होता। शिक्षा प्राप्ति का स्वाभाविक परिणाम होना चाहिये, अपने राष्ट्र के बारे में श्रद्धा की जागृति और अपने कर्तव्य का बोध। शिक्षा प्राप्ति से यदि मनुष्य राष्ट्रभक्त नहीं होता तो…

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राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

पुणे, 01 दिसंबर, 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कोथरूड के यशवंतराव चव्हाण थिएटर में आदित्य प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित कृतज्ञता समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि विश्व कल्याण की पताका फहराते हुए श्रीराम मंदिर बन गया है। अब पहले से भी अधिक भव्य, शक्तिशाली और…

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भक्ति मानव को समष्टि से जोड़ने वाला आध्यात्मिक सत्य है – डॉ. मोहन भागवत जी

भक्ति मानव को समष्टि से जोड़ने वाला आध्यात्मिक सत्य है – डॉ. मोहन भागवत जी

ज्ञान और कर्म भक्ति आधारित होना चाहिए – सरसंघचालक जी संत ज्ञानेश्वर द्वारा रचित श्री ज्ञानेश्वरी के अंग्रेजी संस्करण का विमोचन नागपुर, 30 नवम्बर। लक्ष्मीनगर स्थित साइंटिफिक सभागृह में आयोजित संत ज्ञानेश्वर रचित श्री ज्ञानेश्वरी के अंग्रेजी संस्करण के विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भक्ति…

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'गीता' केवल अध्ययन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की साधना है — डॉ. मोहन भागवत जी

‘गीता’ केवल अध्ययन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की साधना है — डॉ. मोहन भागवत जी

लखनऊ : दिव्य गीता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि, गीता को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारकर जीना है। आज यह कार्यक्रम सम्पन्न अवश्य हुआ है, परन्तु हमारा कर्तव्य केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं हो जाता। हम सब…

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संघ स्वयंसेवकों के भाव बल और जीवन बल से चलता है – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ स्वयंसेवकों के भाव बल और जीवन बल से चलता है – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर, 16 नवंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘…और यह जीवन समर्पित’ का विमोचन किया। कार्यक्रम का आयोजन पाथेय कण संस्थान के नारद सभागार में किया गया। यह पुस्तक राजस्थान के दिवंगत 24 प्रचारकों की जीवन गाथा का संकलन है। इस अवसर पर सरसंघचालक…

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शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों का समाज से सीधा संवाद होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों का समाज से सीधा संवाद होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर, 16 नवंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि समाज किन बातों से लाभान्वित होता है, यह समझने के लिए शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों को समाज से सीधा संवाद बढ़ाना होगा। कुछ विषय केवल ज्ञान के होते हैं, जबकि कई विषय समाज के उपयोग और उत्थान से जुड़े होते हैं।…

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सद्भावना भारत का स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

सद्भावना भारत का स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर, 14 नवम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सद्भावना भारत का स्वभाव है। नियम और तर्क के आधार पर समस्याएं ठीक नहीं हो सकती, इसके लिए सद्भावना चाहिए और हमें यही काम करना है। उन्होंने कहा कि स्वार्थ भावना यह दुनिया का स्वभाव है। स्वार्थ भावना के आधार…

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