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डॉ आम्‍बेडकर की दृष्टि में ‘हिन्‍दुत्‍व’

वर्ष 1935 में डॉ. आम्‍बेडकर ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि ‘मैं एक हिन्‍दू के रूप में पैदा हुआ क्योंकि मेरा इस पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन मैं एक हिन्‍दू रहकर नहीं मरूंगा।’ उन्‍होंने ऐसा किया भी। फिर भी वे हिन्‍दू धर्म को अन्‍य रिलीजन से ऊपर मानते थे।