एक साधारण स्वयंसेवक की भावानुभूति : सरसंघचालक से हुई भेंट पर निःसृत भाव-धारा
स्वयंसेवक साधारण नहीं होता। वह विशिष्ट है। उसकी विशिष्टता “कुल” अथवा “विराट” के अंश होने में है। उसकी विशिष्टता “बूँद” बनकर “समाज-सिंधु” में स्वयं को विसर्जित कर देने में है।
‘धर्म, संस्कृति और समाज का संरक्षण कर राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति’ का लक्ष्य
ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, पांचजन्य संपादक हितेश शंकर, मराठी साप्ताहिक विवेक की संपादक अश्विनी मयेकर और मलयालम दैनिक जन्मभूमि के सह संपादक एम. बालाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत से विस्तृत बातचीत की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा, समाज निर्माण का आधार है विवाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को वाराणसी के खोजवां में आयोजित अक्षय कन्यादान महोत्सव में पिता की भूमिका निभाकर सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
यह युद्ध धर्म और अधर्म के बीच है – डॉ. मोहन भागवत जी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम आपसी मतभेदों में रहते हैं, तो समाज में खाई बढ़ती जाती है।
