संघ स्वयंसेवक श्रीरामार्चनम से करेंगे प्रभु रामलला की स्तुति

— सरयू वंदना के उपरान्त बलिदानी कारसेवकों को श्रद्धांजलि

— राम पथ पर गणवेश में घोषदल का संचलन

— हनुमानगढ़ी पर स्तुति कर पहुंचेंगे नव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मन्दिर

अयोध्या, 18 फरवरी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी (22 फरवरी) के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में घोषवादन से प्रभु श्री रामलला की स्तुति करेंगे। इसे श्रीरामार्चनम् नाम दिया गया है। महीनों के श्रम से विशेष रूप से प्रशिक्षित घोष दल के 100 वादक अयोध्या में मनोहारी घोषवादन व पथ संचलन करेंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार वेणु (बांसुरी), श्रृंग (स्वरद, तुर्य , नागांग, गौमुख) और शंख (बिगुल) पर अलग-अलग रागों और भिन्न-भिन्न अवसरों के अनुरूप रचनाओं का वादन होगा। कुछ रचनाएं स्थिर अवस्था में तथा शेष पथ संचलन (रूट मार्च ) के साथ बजाई जाएंगी। एक वेश, समान लय-स्वर के साथ जब सौ से अधिक स्वयंसेवक कदम से कदम‌ मिलाते हुए अयोध्या के राम पथ पर निकलेंगे तो निश्चित ही अद्भुत और अविश्वसनीय दृश्य प्रस्तुत होगा।

विवरण के अनुसार दिल्ली प्रांत के इस दल में वादकों की संख्या 100 है। पच्चीस स्वयंसेवकों के परिवार भी इस कार्यक्रम में रहेंगे। व्यवस्था से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी साथ रहेंगे। संघ परम्परा के अनुसार प्रत्येक स्वयंसेवक अपना व्यय स्वयं वहन कर रहा है। बीते दिनों आयोजन से जुड़े कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता अयोध्या आकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पतराय से मिलकर आवश्यक अनुमति, सहमति ले चुके हैं।

तय कार्यक्रम के अनुसार स्वयंसेवक 21 फरवरी को प्रातः अयोध्या धाम पहुंचेंगे। पुण्य सरयू के पावन तट पर विक्रमी संवत 2082 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी यानि 22 फरवरी को 3:15 बजे से घोष वादन प्रारंभ होगा। तत्पश्चात पथ संचलन के साथ वादन करते हुए स्वयंसेवक लता मंगेशकर चौक पहुंचेंगे। यहां स्वर सम्राज्ञी लता जी के साथ ही बलिदानी कारसेवकों को 3:35 से 3:55 तक रागमयी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद राम पथ से स्वयंसेवक 4:20 पर हनुमानगढ़ी पहुंचेंगे। 4:35 बजे तक घोष पर स्तुति वादन होगा। 5:15 बजे श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर पहुंचकर यह दल 5:15 से 6:15 बजे तक प्रदक्षिणा और स्थिर वादन करेगा। तत्पश्चात सभी संध्या आरती में सम्मिलित होकर प्रभु श्री रामलला का दर्शन करेंगे।

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