देश का युवा जागरूक, संस्कारित और संगठित होता है, तो देश वैभव के शिखर पर पहुंचता है – अतुल लिमये जी

देश का युवा जागरूक, संस्कारित और संगठित होता है, तो देश वैभव के शिखर पर पहुंचता है – अतुल लिमये जी

गोरक्ष। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर महानगर दक्षिण भाग ने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त “राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी, गोरक्ष प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल जी, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश सिंह जी ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि से किया।

कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, मदन मोहन मालवीय प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों से युवाओं, समाजसेवियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जागरूक नागरिकों ने सहभागिता की।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचार, संस्कार और कर्म पर निर्भर करता है। “युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली पूंजी है। जिस देश का युवा जागरूक, संस्कारित और संगठित होता है, वह देश स्वतः ही विकास और वैभव के शिखर पर पहुंचता है।”

उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनने का संदेश देते हुए कहा कि केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान को भी जीवन का ध्येय बनाना चाहिए। यदि युवा अपने जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण के मूल्यों को अपनाएं, तो देश को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। युवाओं को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो न केवल अपने करियर में आगे बढ़ें, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाएं। वर्तमान समय केवल अवसरों का नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का भी है। युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आएं। राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक है।  युवा अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार और सेवा की भावना को अपनाकर समाज एवं देश के विकास में सक्रिय योगदान दें। आज का समय चुनौतियों के साथ-साथ अपार संभावनाओं का भी है। ऐसे में युवाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस अवसर पर युवाओं ने अपनी जिज्ञासाएं, व प्रश्न रखे। अतुल लिमये जी ने जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ ही प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम के साथ हुआ।

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