विश्व हिन्दू परिषद : स्थापना से सेवा, सुरक्षा और संस्कार तक की यात्रा

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना 1964 में हुई। विश्व हिंदू परिषद एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्व संगठन है। VHP की स्थापना 1964 में एमएस गोलवलकर और एसएस आप्टे ने स्वामी चिन्मयानंद के सहयोग से की थी।। पहली बार 21 मई 1964 में मुंबई के संदीपनी साधनाशाला में एक सम्मेलन हुआ। सम्मेलन आरएसएस सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने बुलाई थी।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप या VHP) की युवा शाखा, एक हिन्दुत्व संगठन बजरंग दल है। “बजरंगी” नाम मुख्यतः हिंदू देवता हनुमान से जुड़ा है, जिन्हें बजरंग बली के नाम से भी जाना जाता है। “बजरंग” हनुमान की शारीरिक शक्ति को दर्शाता है और यह संस्कृत शब्दों “वज्र” (वज्र या हीरा) और “अंग” (अंग या शरीर) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है वज्र के समान शक्तिशाली शरीर वाला व्यक्ति। इसके अलावा दुर्गा वाहिनी को बजरंग दल का महिला चेहरा माना जाता है। इस संगठन को एक दक्षिणपंथी धार्मिक कट्टरपंथी समूह बताया जाता है। दुर्गा वाहिनी उग्रवादी गतिविधियों के लिए युवतियों की भर्ती करती है।

विहिप की युवा शाखा बजरंग दल तथा दुर्गा वाहिनी ने 1984 से लेकर आज तक देश-धर्म संस्कृति व राष्ट्र की रक्षार्थ सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। सेवा, सुरक्षा व संस्कार इनके मूल मंत्र रहे हैं। संस्कृत भाषा, वेद पाठशाला तथा संस्कारों की अभिवृद्धि हेतु भी विहिप ने अनेक कदम उठाए हैं। इतने सब के बावजूद हमारे समक्ष धर्मांतरण, लव जिहाद, सामाजिक समरसता, धर्म स्थलों को सुरक्षा व सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति, संस्कृति व संस्कारों का क्षरण, धार्मिक शिक्षा व जागरूकता का अभाव, विदेशी घुसपैठ, जनसंख्या असंतुलन जैसी अनेक चुनौतियाँ सामने खड़ी हैं जिनका मुकाबला करते हुए हिन्दू समाज को इनसे मुक्ति दिलानी है।

विहिप हिंदू समाज को संगठित करना, हिंदू धर्म की रक्षा करना, और समाज की सेवा कर, स्वास्थ्य, शिक्षा, आत्म-सशक्तिकरण, ग्राम शिक्षा मंदिर आदि के क्षेत्रो में 100000 से अधिक सेवा परियोजनाओं के माध्यम से विहिप हिंदू समाज की जड़ो को मजबूत कर रहा है। विहिप अपने मूल मूल्यों, विश्वासों और पवित्र परंपराओं की रक्षा के लिए श्री रामजन्मभूमि, श्री अमरनाथ यात्रा, श्री रामसेतु, श्री गंगा रक्षा, गौ रक्षा, हिंदू मठ-मंदिर मुद्दा, ईसाई चर्च द्वारा हिंदुओं का धर्मांतरण, इस्लामी आतंकवाद, बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ ,जैसे मुद्दों को उठाकर हिंदू समाज की अदम्य शक्ति के रूप में स्वयं को स्थापित कर रही है।

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