Headlines

55 एकड़ में केले की खेती से हर साल 1.65 करोड़ कमा रहे रामशरण

55 एकड़ में केले की खेती से हर साल 1.65 करोड़ कमा रहे रामशरण

10वीं में फेल होने पर जिस शख्स ने पढ़ाई छोड़ी। पारंपरिक खेती से सिर्फ 15-20 हजार रुपए बचा पाता था। आज वही किसान करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है। बात हो रही है बाराबंकी के ‘केला किंग’ और पद्मश्री से सम्मानित रामशरण वर्मा की। यूपी में ‘टिशू कल्चर’ केले को बढ़ावा देने वाले रामशरण ने इस साल 55 एकड़ में केले की खेती की है। इस वक्त 250 एकड़ में खेती कर रहे हैं। इस साल 55 से 57 एकड़ में केला लगाया था। अगर मुनाफे की बात करें, तो इस साल प्रति एकड़ 3 से 4 लाख रुपए का फायदा हुआ है। अगर न्यूनतम 3 लाख रुपए प्रति एकड़ के मुनाफे को 55 एकड़ के हिसाब से देखें, तो यह रकम 1 करोड़ 65 लाख रुपए होती है।

पद्मश्री से लेकर कई बड़े पुरस्कार मिले

रामशरण वर्मा को कृषि क्षेत्र में कई सम्मान मिल चुके हैं। 2019 में उन्हें पद्मश्री मिला। इससे पहले भारत सरकार का जगजीवन राम किसान पुरस्कार, कृषि नेतृत्व पुरस्कार, यूपी का चौधरी चरण सिंह किसान सम्मान, उद्यान पंडित और नव-अन्वेषक सम्मान मिला। उत्तराखंड और हरियाणा में भी उन्हें आदर्श किसान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

टिशू कल्चर से केला अच्छा तैयार होता है टिशू कल्वर से केले की फसल सामान्य केले के 15 महीने के मुकाबले 11-12 महीने में तैयार होती है। यूपी की सर्दी में इसमें 12-13 महीने लगते हैं, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 11-12 महीने में फसल मिल जाती है। 15 जून से 15 जुलाई तक रोपाई करने पर अगले साल अगस्त-सितंबर में फसल तैयार होती है। त्योहारों में मांग बढ़ने से 15-16 रुपए किलो भाव मिलता है।

50 हजार किसान इस तरह से खेती कर रहे

रामशरण बताते हैं कि हर साल 14-15 हजार किसान उनसे खेती सीखने आते हैं। उनकी तकनीक से 50 हजार किसान ढाई लाख हेक्टेयर में खेती कर रहे हैं। अंबेडकरनगर के किसान ने तीन एकड़ केले से 24 लाख रुपए की बिक्री की। गांव में रोजगार मिलने से लोग शहर नहीं जा रहे।

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *