टेक्नोफ्रेंडली संत... सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की
टेक्नोफ्रेंडली संत... सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की

टेक्नोफ्रेंडली संत… सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की

आंखन देखी अयोध्या… नौंवी कहानी

अयोध्या के टेक्नोफ्रेंडली संत, सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की

आचार्य मिथिलेशनन्दिनी रामलला के 21 युवा पुजारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं

उपमिता वाजपेयी, अयोध्या।

जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।
बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिंखेल सकल नृपलीला।

मतलब, चारों वेद जिनकी श्वास हैं, वे भगवान पढ़ें, यह बड़ा अचरज है। चारों भाई विद्या, विनय, गुण और शील में निपुण हैं और सब राजाओं की लीलाओं के ही खेल खेलते हैं॥

8000 मठ-मंदिर-देवालयों वाली अयोध्या में पहली बार किसी मंदिर के पुजारियों को मंत्र की बकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है। क्या, कब, कैसे करना है इसकी प्रैक्टिस करवाई जा रही है। और रामलला के इन्हीं नए पुजारियों के ट्रेनर हैं, आचार्य मिथिलेशनन्दिनी शरण।

वो अयोध्या के टेक्नोफ्रेंडली संत है। सामने लैपटॉप है, हाथ में कदम और धड़कने गिनकर बतानेवाली एपल वॉच बंधी है। उम्र बमुश्किल 50 के नीचे ही होगी। अध्यात्म और अंधविश्वास के बीच वो लॉजिकल धर्म की पैरवी करते हैं। उनकी बातों में… है राम के वजूद पर हिंदोस्तान को नाज कहनेवाले इकबाल का जिक्र भी है और अज्ञेय के शब्द भी।

वो कहते हैं व्यवस्थित, मानकों के मुताबिक पूजा करना हो तो पुजारियों को यंत्र-तंत्र-मंत्र सिखाना जरूरी है। उन्हें पता होना चाहिए भगवान को जगाया-सुलाया-खिलाया कैसे जाता है। किस वक्त कौन सा मंत्र सुनाया जाता है। किसे कौन सा तिलक लगाया जाता है। भगवती को कौन सा फूल चढ़ता है और राम को कौन सा। आरती 14 बार ही क्यों घुमाई जाती है और गरुण घंटी क्यों बजाई जाती है। यही सब सिखाने उन्होंने तीन संतो-आचार्यों के साथ 6 महीने चिंतन-मनन कर रामलला के भोग-राग-नियम की एक पद्धति तैयार की है।

लक्ष्मण घाट का हनुमत निवास अयोध्या का ऐसा मठ है जहां किसी को भी अपाइंटमेंट लेकर नहीं आना पड़ता। यहां संतन की सोहबत सुबह से शुरू होती है तो न लंच ब्रेक होता है न दुपहरी में विश्राम का वक्त। वेद-उपनिषदों पर बात में रस आने लगा तो मंत्र-धर्म और कहानियों वाली ये महफिल रात दो बजे तक अखंड ज्योत की तरह जलती रहती है। आचार्य मिथिलेशनन्दिनी के यहां आने वालों में उनके अनुयायियों की लंबी लाइन है। इनमें इंजीनियर से लेकर सीए तक हैं। ये लोग कहते हैं आचार्यजी लीडरशिप सिखानेवाले संत हैं।

आचार्य मिथिलेशनन्दिनी आएं-बाएं-साएं लिखने-बोलने वालों के लिए सोशल मीडिया को स्मोकिंग जोन कहते हैं। फिर उनकी बातों में अयोध्या के ट्रेंडिंग सब्जेक्ट्स का जिक्र भी कई बार आ जाता है। मिथिलेशनन्दिनी कहते हैं उन्हें हैरी पॉटर देखना बहुत पसंद है और वो उसके सारे एपिसोड देख चुके हैं। वो हैरी पॉटर के जरिए धर्म समझाने की कोशिश करते हैं। शायद इसी लिए वे यूथ फोक्स्ड धर्म के एंबेसेडर हैं।

पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुके 21 युवाओं को वो रामलला के पुजारी बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। कहते हैं बुजुर्ग भक्ति कर सकता है लेकिन रामलला के गर्भगृह का परिश्रम मुश्किल है। पूजा के लिए दिन में चार बार ठंड में नहाना होता है। गर्भगृह में पोछा लगाना, भोग की व्यवस्था करना होती है। वरिष्ठ में ज्ञान ज्यादा होगा लेकिन वो डेटाबेस के लिए है, जिनसे पूछा जा सके कि 50 साल पहले क्या हुआ था।

अब पुजारियों को ट्रेनिंग की क्या जरूरी हो गई भला? आचार्य मिथिलेशनन्दिनी कहते हैं पूजा में गलती न हो, वक्त न लें, इसके लिए उन्हें हूबहू राम मंदिर जैसे विग्रह के साथ रियल टाइम ट्रेनिंग दी जा रही है। नए मंदिर में नए विग्रह के साथ पहली बार रामलला की 6 बार आरती होंगी। मंगला, श्रृंगार, राजभोग, उत्थान, संध्या और शयन। पहली ही बार होगा जब रामलला को गायक पद गाकर सुनाएंगे। इसके लिए बकायदा मंदिर में गायक नियुक्त किए जाएंगे। नए मंदिर में नए विग्रह के साथ ही पहली बार राजोपचार से रामलला की पूजा होगी। मतलब पूजा उस वस्तु, मंत्र, समय, स्थान और वैभव के मुताबिक होगी जो रामलला को पिछले इतने सालों में कभी नहीं मिली।

उपमिता वाजपेयी

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *