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पौधशालाओं के लिए वरदान होंगी बायोडिग्रेडेबल कप

पौधशालाओं के लिए वरदान होंगी बायोडिग्रेडेबल कप

प्लास्टिक प्रदूषण आज केवल शहरों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर रूप से देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से नर्सरी में उपयोग होने वाली काली पॉलीथिन और प्लास्टिक ट्रे मिट्टी की उर्वरता को धीरे-धीरे नष्ट करती हैं और पर्यावरण के लिए दीर्घकालिक खतरा बनती…

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कैसे करें मुनगा कीटों से आम की फसल का बचाव

कैसे करें भुनगा कीटों से आम की फसल का बचाव

आम की फसल के समय भुनगा कीट एक बड़ी समस्या बनते हैं क्योंकि पूरे वर्ष नम वातावरण एवं बारिश से आम की फसल पर आम का फुदका कीट बहुत तेजी से फैलता है। मुख्य रूप से आम का फुदका कीट पूरे भारतवर्ष में अधिक नुकसान पहुँचाने वाला कीट है इसकी तीन जातियाँ पायी जाती हैं।…

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अस्सी घाट की गंगा आरती भी कराएगा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन

अस्सी घाट की गंगा आरती भी कराएगा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन

गंगा आरती की समितियों ने कहा-लिखित में कोई प्रस्ताव नहीं, पीएम मोदी तक भी उठाएंगे ये मुद्दा वाराणसी। अस्सी घाट की गंगा आरती की भी जिम्मेदारी श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को देने की तैयारी शुरू हो गई है। यहां भी नमो घाट और ललिता घाट की तर्ज पर वैतनिक अर्चकों से ही गंगा आरती कराने…

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राष्ट्र-धर्म’ का सजग प्रहरी – वीरव्रती खालसा पंथ

राष्ट्र-धर्म’ का सजग प्रहरी – वीरव्रती खालसा पंथ

नरेन्द्र सहगल वैशाखी पर्व भारत के उन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, जिनका सम्बन्ध राष्ट्र की सुरक्षा और स्वतंत्रता के साथ है. नई फसल के स्वागत के साथ ग्रीष्म काल के अभिनन्दन के रूप में हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले इस पर्व के साथ दो राष्ट्रीय महत्व के प्रसंग जुड़ जाने से पर्व का…

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संविधान सभा में संस्कृत : राज-भाषा अथवा राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में

संविधान सभा में संस्कृत : राज-भाषा अथवा राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में

संविधान निर्माण की प्रक्रिया के दौरान संविधान सभा में ‘भाषा’ के विषय पर 12-14 सितम्बर, 1949 को वाद-विवाद हुआ था. इस प्रस्ताव पर सभा में दो पक्ष थे – पहला जो स्पष्ट रूप से संस्कृत को राज-भाषा और राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करते थे और दूसरा पक्ष एकदम खिलाफ नहीं था, लेकिन उसके…

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बौद्ध दर्शन की भाषा संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के डॉ.आंबेडकर के प्रस्ताव पर अचरज कैसा?

बौद्ध दर्शन की भाषा संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के डॉ.आंबेडकर के प्रस्ताव पर अचरज कैसा?

ऐसी है संस्कृत की समृद्ध परंपरा. किसी एक धर्म या दर्शन का इस पर अधिकार नहीं रहा. ब्राह्मण दर्शन है, तो बौद्ध दर्शन भी है. नास्तिक दर्शन भी है. वेदों की प्रशस्ति है तो उसे धूर्त भांडों की रचना भी इसी जुबान में कहा गया है. यहाँ अर्थशास्त्र और कामशास्त्र भी है. मेघदूत और अभिज्ञान…

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प्रेम के उपासक महर्षि रमण

प्रेम के उपासक महर्षि रमण

महर्षि रमण एक ऐसी विभूति थे जो बाल्यावस्था में ही प्रभु भक्ति को समर्पित हो गये थे। बालक वेंकट रमण बहुत ही सुन्दर और – स्वस्थ थे किन्तु उनकी सामान्य शिक्षा में उनकी रुचि बहुत कम थी। इस कारण उन्हें विद्यालय भेजने में उनकी माँ को अथक प्रयास करना पड़ता था। महर्षि बहुत सोते थे।…

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डॉ. आम्बेडकर की दृष्टि में 'हिन्दुत्व'

डॉ. आम्बेडकर की दृष्टि में ‘हिन्दुत्व’….

भारत रत के प्रथम कानून मंत्री एवं संविधान सभा के अध्यक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के नाम पर इन दिनों हिन्दुओं और उनके सनातन धर्म को निशाने पर लिया जा रहा है। मगर डॉ. आम्बेडकर का मानना था, ‘पंथों और सिद्धान्तों का मिश्रित समूह ही हिन्दुत्व है।’ उनके जीवन में सबसे बड़ी बाधा हिन्दू…

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संघ का ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है – रामलाल जी

संघ का ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है – रामलाल जी

रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त प्रमुख जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। गोष्ठी में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि व दीप प्रज्ज्वलन से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू जी ने…

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स्व-आधारित राष्ट्र निर्माण ही हमारी सिविलाइजेशनल ड्यूटी’ – जे. नंदकुमार जी

स्व-आधारित राष्ट्र निर्माण ही हमारी सिविलाइजेशनल ड्यूटी’ – जे. नंदकुमार जी

पुणे, 10 अप्रैल। प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि “आत्मविस्मृत राष्ट्र विनाश की ओर मार्गक्रमण करता है। आज भी औपनिवेशिक मानसिकता के कारण भारत की स्व-आधारित व्यवस्था नष्ट हो चुकी है। स्वतंत्रता के बाद अब विकसित भारत के लिए ‘स्व’ आधारित राष्ट्र निर्माण करना हमारी सिविलाइजेशनल ड्यूटी है”। कोथरूड…

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