वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर
पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी से सागर के वक्षस्थल पर अंकित अब भी तुम सुनो लगाकर ध्यान कथा वह लहर- लहर दुहराती है।। हांँ पराधीन भारत का था तब, थी आग लगी जन के मन में। ‘कैसे माता…