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काशी में खुलेगा तीसरा बड़ा अन्नक्षेत्र, शरद पूर्णिमा से भक्तों को मिलेगा भोजन-प्रसाद

काशी में खुलेगा तीसरा बड़ा अन्नक्षेत्र, शरद पूर्णिमा से भक्तों को मिलेगा भोजन-प्रसाद

काशी में मां अन्नपूर्णा मंदिर और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नक्षेत्र के बाद अब तीसरे विशाल अन्नक्षेत्र का संचालन शुरू होने जा रहा है। 25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा के अवसर पर पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में इस अन्नक्षेत्र का विधिवत पुनः शुभारंभ किया जाएगा। मंदिर प्रांगण में निर्माण व नवीनीकरण कार्य युद्धस्तर…

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पितृपक्ष का पालन किसे और क्यों करना चाहिए?

पितृपक्ष का पालन किसे और क्यों करना चाहिए?

पितृपक्ष को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसका पालन केवल हिन्दी भाषी हिन्दू ही करते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी हिन्दुओं के लिये यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय है। हिन्दी, तमिल, तेलुगु, गुजराती समेत विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं के लोग पितृपक्ष में अपने पितरों…

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पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के एक महान विचारक, दार्शनिक और राजनेता थे, जिन्होंने दुनिया को एकात्म मानववाद का एक बेहद अनूठा और गहरा सिद्धांत दिया। उनके इस दर्शन में व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ईश्वर को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक ही श्रृंखला के अभिन्न हिस्से के रूप में देखा गया है। उनके इसी चिंतन…

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क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

अगर, तगर, देवदारु, चन्दन, रक्त चन्दन, गूगुल, जायफल, लौंग, चिरायता, असगन्ध, यह दसों चीजें समान भाग में लेनी चाहिए। इसके साथ में विशेष रोग की विशेष औषधियाँ भी मिला लेनी चाहिए। तैयार औषधियों का दशवाँ भाग शर्करा और दशवाँ भाग घृत मिला लेना चाहिए। विशेष रोगों की विशेष हवन सामग्री- शीत ज्वर – (1) पटोल…

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‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

मनमोहन वैद्य जी “वैष्णव जन तो तेणे रे कहिये, जे पीड़ पराई जाणे रे”। दूसरों की पीड़ा की अनुभूति कर उन्हें उस पीड़ा से मुक्त करने के सहज कर्म को ‘धर्म’ कहा गया है। राजा रंतिदेव का प्रसिद्ध वचन है – “मुझे न राज्य की कामना है, न स्वर्ग की और न ही मोक्ष की।…

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वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार

भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक चेतनत्त्व के पटल पर भगवान वामन का स्वरूप केवल दशावतार रूपी परम्परा में एक धार्मिक दृष्टि तक ग्रहण करना उनके व्यक्तित्व की व्यापकता एवं विराटता को सीमित कर देना प्रतीत होता है। वामन अनुकृति के अन्तर्गत भारतीय मनीषियों ने स्व मेधा से सत्ता, सामर्थ्य, विनम्रता, आत्मसंयम एवं लोककल्याण के ऐसे गहनतं जीवन-मूल्यों…

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धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

डॉ. बिपिन कुमार पाण्डेयशिक्षक, ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति विजय में नहीं, क्षमा में होती है; क्योंकि विजय केवल शत्रु को परास्त करती है, जबकि क्षमा शत्रुता का ही अंत कर देती है। जहाँ प्रतिशोध सभ्यता का अवसान करता है, वहीं क्षमा संस्कृति का उदय करती है। मनुष्य की वास्तविक विजय…

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11 सितम्बर 1893: जब शिकागो में गूंजा भारत का सनातन संदेश

11 सितम्बर 1893: जब शिकागो में गूंजा भारत का सनातन संदेश

शिकागो भाषण, 11 सितम्बर 1893   (Sankar, The Monk As the unknown life of Swami Vivekananda, Penguin Books)  ‘भारतवर्ष की विभूतियाँ’ नामक पुस्तक में शिकागों भाषण और स्वामी विवेकानन्द के विषय में लिखा है, “सन 1893 में आप शिकागो सर्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने के हेतु प्रतिनिधि होकर अमेरिका गये। अमेरिका और इंग्लैण्ड में करीब…

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‘हनुमान अंश’ की दहाड़

‘हनुमान अंश’ की दहाड़

इस समय सारे देश में फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चर्चा है। कल शुक्रवार को इस मूवी ने चार सप्ताह पूरे किए और एक ऐसा इतिहास रच दिया कि सारे फिल्मी पंडित भौचक होकर देखते रह गए..! अनेकों के लिए यह सफलता महज आश्चर्य है। अनेक लोग इस फिल्म की तुलना 1975 में प्रदर्शित हुई ‘जय…

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कई समस्याओं का समाधान है गो पालन

पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गोमांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। यह कृषि की रीढ़ है। गाय का मल एवं मूत्र असाध्य रोगों में लाभकारी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। हाई…

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